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“लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग वंदे मातरम् को जिन्ना के चश्मे से देखकर इसकी पंक्तियों पर आपत्ति जताते हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर किस भावना से वंदे मातरम् को सांप्रदायिक बताया जा रहा है। पूरी राजनीतिक रिपोर्ट पढ़ें।”

नई दिल्ली। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद विपक्ष द्वारा वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियों पर आपत्ति जताने का मुद्दा उठा। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश को जोड़ने वाले गीतों को बाबा साहेब अंबेडकर से लेकर राष्ट्र के सभी महान नेताओं ने सम्मान दिया है।

राजनाथ ने कहा—
“वंदे मातरम् राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक है। इसे सांप्रदायिक चश्मे से देखने वालों को अपनी सोच बदलनी होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् को पहली बार 1870 में साहित्य जगत में स्थान मिला और बाद में स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे आंदोलन का प्रतीक बनाया।
उनके अनुसार, जिन्ना की राजनीति का परिणाम देश ने 1947 में भोग लिया, और आज भी उसकी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश देश की एकता के लिए खतरनाक है।

सत्ता पक्ष के सांसदों ने राजनाथ सिंह के बयान का समर्थन किया, जबकि विपक्ष इस पर असहमत दिखा। सदन में इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक भी देखी गई।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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