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बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने और बयान रिकॉर्ड से हटाने के लिए Rule 380 के तहत नोटिस दिया है। यह नोटिस इंडिया-US ट्रेड डील और केंद्रीय बजट पर राहुल के बयान के बाद आया है।

हाइलाइट्स:

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस दिया
  • इंडिया-US ट्रेड डील और बजट पर बयान बना विवाद की वजह
  • असंसदीय भाषा और तथ्यहीन आरोप का आरोप
  • Rule 380 के तहत रिकॉर्ड से शब्द हटाने की मांग
  • 2023 में भी रद्द हो चुकी है राहुल की सदस्यता

नई दिल्ली। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता समाप्त करने के प्रस्ताव को लेकर लोकसभा सचिवालय में नोटिस दिया है। यह कदम उस बयान के बाद उठाया गया है, जिसमें राहुल गांधी ने इंडिया-US ट्रेड डील और केंद्रीय बजट पर सवाल खड़े किए थे।

बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में तथ्यों के बिना आरोप लगाए और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।

Rule 380 के तहत नोटिस

लोकसभा की कार्यवाही और नियमावली के Rule 380 के तहत दिए गए इस नोटिस में मांग की गई है कि राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाया जाए।

नोटिस में कहा गया है कि:

  • असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया गया
  • तथ्यहीन आरोप लगाए गए
  • सदन की गरिमा का उल्लंघन हुआ

किस बयान से शुरू हुआ विवाद?

लोकसभा में राहुल गांधी ने राजनीति की तुलना मार्शल आर्ट से करते हुए ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आपत्ति जताई थी।

अब यदि यह मामला विशेषाधिकार हनन समिति तक जाता है, तो राहुल गांधी के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ सकती है।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

विशेषाधिकार नोटिस को लेकर पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा:
“आप लोगों को वे कीवर्ड्स देते हैं क्या?”

पहले भी रद्द हो चुकी है सदस्यता

साल 2023 में सूरत की एक अदालत ने 2019 के कोलार भाषण मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय से राहत मिलने के बाद उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी।

आगे क्या हो सकता है?

यदि विशेषाधिकार हनन या अन्य संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो:

  • मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है
  • स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है
  • चेतावनी, निलंबन या अन्य कार्रवाई संभव है (निर्णय सदन पर निर्भर)

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और अंतिम निर्णय लोकसभा की प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाएगा।

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