“ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए? कांग्रेस ने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए वजह स्पष्ट की। पूरी खबर पढ़ें।“
हाइलाइट्स :
• राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर साइन नहीं किए
• कांग्रेस ने फैसले के पीछे संसदीय परंपराओं का हवाला दिया
• कांग्रेस के 118 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए
• स्पीकर पर विपक्ष को बोलने से रोकने का आरोप
• टीएमसी ने पहले स्पीकर से संवाद की दी सलाह
नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासी हलचल तेज है। इसी बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न करने का मामला चर्चा में आ गया है। कांग्रेस ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह फैसला संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ध्यान में रखकर लिया गया।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, संसदीय लोकतंत्र में यह परंपरा मानी जाती है कि विपक्ष का नेता सीधे तौर पर स्पीकर को हटाने की मांग का प्रस्तावक न बने। इसी कारण राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए, हालांकि पार्टी के फैसले से वे पूरी तरह सहमत हैं।
कांग्रेस ने 118 सांसदों के साथ दिया नोटिस
कांग्रेस ने लोकसभा के नियम 94C के तहत स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि मंगलवार दोपहर 1:14 बजे यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया।
शशि थरूर ने किया पार्टी के फैसले का समर्थन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, वह उसका समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि वे बजट सत्र की बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पार्टी लाइन के साथ खड़े हैं।
विपक्ष के आरोप: चार बड़ी घटनाओं का जिक्र
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर द्वारा साझा किए गए नोटिस में स्पीकर के खिलाफ चार प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। इनमें—
• राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को बोलने से रोका जाना
• 2020 के चीन सीमा विवाद पर जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देने पर आपत्ति
• आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन
• भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई टिप्पणी
इसके अलावा, नोटिस में स्पीकर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का कथित आग्रह भी सवालों के घेरे में है।
टीएमसी का रुख
इस पूरे मामले पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस से सुझाव दिया था कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले स्पीकर से बातचीत की जानी चाहिए।
टीएमसी ने स्पष्ट किया कि यदि दो-तीन दिनों में स्पीकर विपक्ष की मांगों पर कोई कदम नहीं उठाते हैं, तो वे भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे।
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