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जमीन पर तैनात सैनिकों की जरूरत नहीं – रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच सऊदी अरब, लेबनान और तेल बाजार पर बढ़ा असर।

हाइलाइट्स:

  • रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले से आग लगी
  • ट्रंप बोले– जमीन पर तैनात सैनिकों की शायद जरूरत नहीं
  • ईरान ने इजरायल और अरब देशों पर मिसाइलें दागीं
  • लेबनान में इजरायली हमलों में 31 लोगों की मौत
  • सऊदी रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक से तेल बाजार में हलचल

नई दिल्ली। अमेरिका–इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में जमीन पर सैनिक तैनात करने की शायद जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बयान रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ड्रोन हमले के बाद आया है, जिसे लेकर उन्होंने पहले कड़े तेवर दिखाए थे।

रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला

सऊदी अरब की राजधानी Riyadh स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे परिसर में आग लग गई। सऊदी अधिकारियों के अनुसार चार प्रोजेक्टाइल को मार गिराया गया। हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि हमले और अमेरिकी जवानों की मौत का जवाब दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, सोमवार तक कार्रवाई के दौरान छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।

पहले बयान से अलग रुख

इससे पहले ईरान पर हमले के बाद ट्रंप ने संकेत दिए थे कि जमीन पर सैनिक भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अब उन्होंने कहा है कि “शायद उनकी जरूरत नहीं पड़ेगी।” इसे उनके रुख में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा टकराव

संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा।

  • ईरान ने इजरायल और कई अरब देशों पर मिसाइलें दागीं।
  • लेबनान से Hezbollah ने रॉकेट और ड्रोन हमले किए।
  • इसके जवाब में इजरायल ने Beirut के दक्षिणी इलाकों और दक्षिणी लेबनान में भारी हवाई हमले किए, जिनमें 31 लोगों की मौत की खबर है।

इजरायल ने लंबी लड़ाई की चेतावनी दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

खामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़े

तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब US-इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के मारे जाने का दावा किया गया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों की शुरुआत के बाद से सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट ने 131 शहरों में कम से कम 555 मौतों की जानकारी दी है।

अमेरिका से बातचीत से इनकार

ईरान के वरिष्ठ नेता Ali Larijani ने स्पष्ट किया है कि वॉशिंगटन की ओर से बातचीत के संकेतों के बावजूद तेहरान अमेरिका से किसी भी तरह की वार्ता नहीं करेगा। इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

सऊदी रिफाइनरी पर हमला, ऊर्जा बाजार चिंतित

ईरान ने सऊदी अरब की Ras Tanura Refinery पर ड्रोन हमला किया, जिससे प्रतिदिन पांच लाख बैरल से अधिक क्षमता वाली इकाई का संचालन कुछ समय के लिए बाधित हुआ।

साथ ही Strait of Hormuz के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।

हालात पर नजर

मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन, तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल जमीनी युद्ध से बचना चाहता है, लेकिन क्षेत्रीय टकराव की आग कब और कितना भड़केगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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