“संसद बजट सत्र 2026 में राहुल गांधी ने विवादित किताब को लेकर कहा—‘या तो नरवणे या पेंगुइन झूठ बोल रहा है’। बजट चर्चा से पहले लोकसभा में हंगामा।“
हाइलाइट्स :
- संसद के बजट सत्र 2026 में सरकार-विपक्ष के बीच गतिरोध जारी
- विवादित किताब पर राहुल गांधी का तीखा बयान
- बजट चर्चा से पहले लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित
- विपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग पर अड़ा
- महिला सांसदों के पत्र को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान मंगलवार को सियासी टकराव और तेज हो गया। यूनियन बजट 2026-27 पर आम चर्चा से पहले लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक विवादित किताब को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
राहुल गांधी ने कहा— “या तो नरवणे झूठ बोल रहा है या फिर पेंगुइन।”
उनके इस बयान को सरकार और सत्ता पक्ष पर सीधा हमला माना जा रहा है। विपक्ष की मांग है कि बजट पर चर्चा से पहले राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया जाए, जबकि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।
बजट चर्चा से पहले बार-बार स्थगित हुई कार्यवाही
लोकसभा में विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। सत्र की शुरुआत से ही अमेरिका-भारत ट्रेड डील, SIR और अन्य मुद्दों को लेकर संसद में गतिरोध जारी है।
महिला सांसदों का स्पीकर को समर्थन
इस बीच, बीजेपी की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का समर्थन करते हुए उन्हें पत्र लिखा। पत्र में आरोप लगाया गया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्षी सांसदों ने चेयर पर कागज फेंके और सदन के वेल में जाकर अनुचित व्यवहार किया।
बीजेपी सांसदों का कहना है कि 4 फरवरी को विपक्ष की कुछ महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट को घेर लिया और बाद में स्पीकर के चैंबर के पास पहुंच गईं। उन्होंने स्पीकर से इस कथित घटना में शामिल सांसदों के खिलाफ “सबसे सख्त कार्रवाई” की मांग की है।
कांग्रेस का पलटवार
बीजेपी महिला सांसदों का यह पत्र, कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा पहले लिखे गए पत्र के जवाब में आया है। कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ दल उन्हें लेकर झूठे, बेबुनियाद और बदनाम करने वाले दावे कर रहा है।
सियासत तेज, बहस जारी
बजट सत्र के बीच यह विवाद न सिर्फ संसद के भीतर, बल्कि बाहर भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। अब देखना यह है कि क्या बजट बहस सुचारू रूप से आगे बढ़ पाती है या फिर सियासी टकराव सत्र पर भारी पड़ता है।
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