“ओवैसी से डरी कांग्रेस? संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खड़गे और इमरान मसूद की बातचीत लीक होने के बाद यूपी की सियासत में हलचल तेज। 2027 विधानसभा चुनाव और मुस्लिम वोट बैंक पर नए समीकरणों की चर्चा।“
हाइलाइट्स:
- संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खड़गे और इमरान मसूद की कथित बातचीत लीक
- असदुद्दीन ओवैसी को लेकर यूपी में सियासी रणनीति पर चर्चा
- मुस्लिम वोट बैंक को लेकर कांग्रेस की चिंता पर विपक्ष का हमला
- 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति तेज
- एआईएमआईएम और कांग्रेस प्रवक्ताओं की सतर्क प्रतिक्रिया
अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी सम्पादक
लखनऊ/नई दिल्ली। ओवैसी से डरी कांग्रेस? संसद परिसर में हुई एक कथित बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल राजनीतिक गलियारों में तेजी से गूंज रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी सांसद इमरान मसूद के बीच हुई बातचीत का अंश सामने आने के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि संसद परिसर में अनौपचारिक चर्चा के दौरान खड़गे ने धीमी आवाज में असदुद्दीन ओवैसी को लेकर टिप्पणी की, जिसे कथित तौर पर माइक ने रिकॉर्ड कर लिया। इस कथन को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस की रणनीतिक चिंता के रूप में देख रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर।
यूपी की सियासत और 2027 की तैयारी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर छह सीटें जीती थीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम यूपी में सक्रिय रूप से चुनाव मैदान में उतरती है, तो विपक्षी वोटों के बिखराव की आशंका बढ़ सकती है।
कांग्रेस को आशंका है कि यदि मुस्लिम मतों का विभाजन हुआ तो उसका सीधा नुकसान पार्टी को हो सकता है। हालांकि पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इस कथित बातचीत पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।
बिहार-महाराष्ट्र के संकेत
बिहार और महाराष्ट्र के हालिया चुनावी रुझानों में एआईएमआईएम की सक्रियता ने कांग्रेस के रणनीतिकारों का ध्यान खींचा है। यही वजह है कि यूपी में संभावित गठबंधन समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।
एआईएमआईएम की प्रतिक्रिया
एआईएमआईएम के प्रवक्ताओं ने इस मुद्दे पर संयमित प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि आधिकारिक जानकारी के बिना टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
राजनीतिक संदेश क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम 2027 की बिसात पर विपक्षी एकजुटता और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रहा है। कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बनाए रखे और गठबंधन राजनीति में संतुलन साधे।
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