कल्याण की एक अदालत ने ठाणे जिले के विभिन्न हिस्सों से पकड़े गए आठ बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में दोषी ठहराया है। अदालत ने पांच दिसंबर को फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को नौ महीने के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा दी है। कल्याण की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस जी इनामदार ने आठों आरोपियों को आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम तथा विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दोषी पाया। आरोपी अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किए गए थे।

अदालत ने चार मामलों में पारित फैसले में कहा कि चूंकि सभी आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, इसलिए वे कानून के अनुसार दंड के पात्र हैं। इसके बावजूद, अदालत ने उनके मानवीय और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दंड तय किया। अदालत ने यह भी बताया कि आरोपी गरीबी, अज्ञानता और निरक्षरता के कारण यह प्रस्तुत नहीं कर सके कि उन्होंने बिना किसी दस्तावेज़ के भारत में प्रवेश कैसे किया। इनके खिलाफ ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम पांच साल तक की सजा हो सकती थी, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सजा कम रखी गई।

सजा पाने वाले आरोपी
ठाणे जिले के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में चार महिलाएं शामिल हैं: मोइना गाजी उर्फ़ मोइना मस्जिद सरदार (37), अमीना जहांगीर गाजी (22), शहनाज मोहम्मद अली सरदार (44) और नरगिस मोहम्मद सरदार (32), जिन्हें डोंबिवली से गिरफ्तार किया गया था। माजिदा रसूल शेख (35) को कल्याण से गिरफ्तार किया गया।

इसके अतिरिक्त, पेंटर का काम करने वाले मोहम्मद शांतो यूनुस मुल्ला (30) और ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली उनकी पत्नी सुमी मोहम्मद शांतो मुल्ला (28) को भी कल्याण से गिरफ्तार किया गया। नूर मोनू पठान नामक मजदूर को उल्हासनगर से पकड़ा गया।

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