राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ने भारत की क्षमता को नज़रअंदाज़ किया। गुजरात के भावनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने 1991 से पहले के लाइसेंस-कोटा राज और भारत के बाज़ार खोलने के बाद आयात पर कांग्रेस के ज़ोर की आलोचना की। आत्मनिर्भरता के अपने आह्वान को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा और दुनिया के सामने मज़बूती से खड़ा होना होगा। भारत में क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन आज़ादी के बाद कांग्रेस ने भारत की पूरी क्षमता को नज़रअंदाज़ कर दिया।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इसलिए आज़ादी के 6-7 दशक बाद भी भारत को वह सफलता नहीं मिली जिसका वह हक़दार था। इसके दो बड़े कारण थे। लंबे समय तक कांग्रेस सरकार ने देश को लाइसेंस-कोटा राज में उलझाए रखा और उसे विश्व बाज़ार से अलग-थलग रखा। और फिर, जब वैश्वीकरण का दौर आया, तो आयात का ही एकमात्र रास्ता अपनाया गया। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान हुए घोटालों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि उनकी नीतियों ने भारत की असली ताकत को उजागर होने से रोका।पीएम मोदी ने कहा कि हज़ारों, लाखों और करोड़ों के घोटाले हुए। कांग्रेस सरकारों की नीतियों ने देश के युवाओं को बहुत नुकसान पहुँचाया। इन नीतियों ने भारत की असली ताकत को उजागर होने से रोका। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि देश का “सबसे बड़ा दुश्मन” दूसरे देशों पर निर्भरता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत ‘विश्वबंधु’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया में कोई हमारा बड़ा दुश्मन नहीं है। अगर हमारा कोई दुश्मन है, तो वह है दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता। यह हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है, और हमें मिलकर भारत के इस दुश्मन, निर्भरता के दुश्मन को हराना होगा। हमें इसे हमेशा दोहराना चाहिए।उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिर और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भारत बड़ी विदेशी निर्भरता बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि विदेशी निर्भरता जितनी अधिक होगी, देश की विफलता उतनी ही बड़ी होगी। वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश को आत्मनिर्भर बनना होगा। अगर हम दूसरों पर निर्भर रहेंगे, तो हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचेगी। हम 1.4 अरब देशवासियों का भविष्य दूसरों पर नहीं छोड़ सकते। हम देश के विकास के संकल्प को दूसरों पर निर्भर नहीं छोड़ सकते। हम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते।

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