राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ । कोच्चि में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केरल में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा 25 प्रतिशत सीटें हासिल करेगी। उन्होंने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर भी पूरा विश्वास व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री आज कोच्चि में मलयाला मनोरमा समाचार पत्र द्वारा आयोजित विकास शिखर सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, नरेंद्र मोदी ने जातिवाद, वंशवाद और तुष्टिकरण की राजनीति को बदलकर काम की राजनीति को अपनाया। पूरा देश इस बदलाव का अनुभव कर रहा है। उन्होंने व्यवस्था और व्यवहार, दोनों से भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए दृढ़ प्रयास किए हैं और इन प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता मिली है।शाह ने कहा कि हम आर्थिक दृष्टि से अस्थिरता का शिकार थे। अटल जी, भारत की अर्थव्यवस्था को 11वें नंबर पर छोड़कर गए थे। मनमोहन सिंह ने इसे स्थिर रखा, 11वें नंबर से 12वें नंबर पर नहीं गए। बीते 11 वर्षों में मोदी जी ने 11वें नंबर से भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया। उन्होंने कहा कि जब तक हम शिखर पर नहीं पहुंचते, महान भारत की रचना नहीं करते, आराम करने का अधिकार किसी को नहीं है। जब आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया था, मोदी जी ने लक्ष्य रखा था कि 75 से 100 साल की इस यात्रा के दौरान 140 करोड़ देशवासियों को परिश्रम की पराकाष्ठा करनी है और देश को दुनिया में हर क्षेत्र में शिखर पर पहुंचाना है। शाह ने आगे कहा कि विपक्ष (कांग्रेस) के उपराष्ट्रपति प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी वही हैं, जिन्होंने वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने के लिए सलवा जुडूम का जजमेंट दिया था। अगर ऐसा न किया गया होता, तो उग्रवाद 2020 तक समाप्त हो गया होता। केरल ने नक्सलवाद का दंश झेला है, उग्रवाद को भी सहा है। केरल की जनता जरूर देखेगी कि वामपंथियों के दबाव में कांग्रेस ने किस तरह से ऐसे प्रत्याशी का चुनाव किया गया है, जिसने वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का उपयोग किया।शाह ने कहा कि केरल पहले ही एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों के शासनकाल में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था की गिरावट का अनुभव कर चुका है। मेरा मानना ​​है कि केरल की जनता अब भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। दूसरी बात, केरल सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है। मैं सभी को पीएफआई के बारे में याद दिलाना चाहता हूँ, जो राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त एक संगठन है, जिसे उनकी निगरानी में पनपने दिया गया। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ कि अगर मोदी सरकार न होती, तो आज भी केरल सरकार पीएफआई पर प्रतिबंध नहीं लगाती। केरल की जनता समझ गई है कि उन्हें ऐसी सरकार नहीं चाहिए जो सिर्फ़ अपने कार्यकर्ताओं के लिए काम करे, बल्कि ऐसी सरकार चाहिए जो जनता के लिए काम करे।

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