जम्मू
देश की शान और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन (सेवानिवृत्त) बाना सिंह का आज जन्मदिन है। वह 77 साल के हो जाएंगे। कड़ाके की ठंड हो रही है लेकिन वह सुबह छह बजे तक नियमित उठ जाते हैं।
सोमवार को सेना के एक कार्यक्रम के लिए उधमपुर जाना था तो भोर में चार बजे ही उठ गए। कहते हैं कि सेना का आदेश आज भी उनके लिए उतना ही महत्व रखता है जितना सेवा के दिनों में था।
करीब 150 किलोमीटर की यात्रा कर लौटें हैं लेकिन चेहरे पर चमक कायम है। उनका जोश और जज्बा अब भी सेना के दिनों जैसा है। वह न सिर्फ भारत-पाकिस्तान बल्कि दुनिया की हर महत्वपूर्ण घटना पर नजर रख रहे हैं। प्रस्तुत हैं बाना सिंह से बातचीत के प्रमुख अंश।
बाना सिंह कहते हैं कि मैंने पिछले दिनों देखा कि बेटियां बॉर्डर पर गश्त कर रही हैं। यह मुझे अच्छा नहीं लगा। वह कहते हैं कि बेटियों को सेना में भरपूर अवसर दिया जाए। बहुत सारे स्थान हैं जहां उन्हें तैनाती दी जा सकती है। यह उचित नहीं है कि मां बॉर्डर पर काम करे और बेटा चारपाई पर सोए। बॉर्डर बहुत संवेदनशील होता है। इसे जिम्मेदार लोगों को समझना चाहिए।
पाकिस्तान भरोसेमंद नहीं, लेकिन पड़ोसी तो है, पानी न रोके, घुटने पर लाने के लिए और भी उपाय
बाना सिंह मानते हैं कि पाकिस्तान पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। वह कहते हैं, पाकिस्तान ऐसा देश है जो हर हार के बाद दुस्साहस करता है और पिटता है। उसकी हालत बहुत खराब है।अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। एक कहावत है। रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया। भारत के कदमों से पाकिस्तान की बस ऐसी ही स्थिति है। इसके बावजूद वह सबक नहीं लेता। उससे हमेशा सतर्क रहना होगा।
सिंधु जल संधि के संबंध में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान का खास तौर से जिक्र करते हुए बाना सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान पड़ोसी है। पानी जाने से रोक दिया गया तो वहां के आम लोग परेशान हो जाएंगे। भारत बड़ा भाई है। यहां से ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे वहां के आम लोग परेशान हों। भारत को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे वहां की सरकार पर असर पड़े। मुझे लगता है कि ऐसे तमाम रास्ते हैं जिससे केंद्र सरकार पाकिस्तान को घुटनों पर ला सकती है। ऑपरेशन सिंदूर में सरकार ने वैसा ही किया जैसा जनता चाहती थी।
रिक्त पद तेजी से भरे जाएं, अग्निवीर भर्ती में तेजी से हो सुधार
बाना सिंह कहते हैं कि सेना में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति ऑफिशियल पोस्ट से लेकर सीमा तक है। आज देश के लगभग सभी पड़ोसी अशांत हैं और बॉर्डर की संवेदनशीलता पहले से ज्यादा है। ऐसे में रिक्त पदों को तेजी से भरना चाहिए। सेना को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए। वह कहते हैं कि आज युद्ध का तौर तरीका बदल रहा है। तकनीक बढ़ रही है। हमारा देश इस ओर अच्छा काम कर रहा है। आधुनिकीकरण होना चाहिए लेकिन जहां प्रयोग जवानों से जुड़ा हो वहां निर्णय बहुत विचार-विमर्श कर और फील्ड से जुड़े लोगों के फीडबैक से हीना चाहिए।

अग्निवीर भर्ती का उल्लेख करते हुए बाना सिंह कहते हैं कि यह प्रयोग बिल्कुल ठीक नहीं है। इसमें सुधार की जरूरत है। चार साल बाद दूसरी सेवा में भेजना विकल्प नहीं है। बुनियादी बात यह है कि अग्निवीर जब तक सीखता है उसके सेवा से बाहर जाने का समय आ जाता है। इससे सेना को क्या फायदा हुआ? बड़े लोगों को इस पर सोचना होगा।
बाना सिंह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी सिविया फ्लोरेस को हिरासत में लिए जाने को भविष्य के लिए गहरे संकट के रूप में देख रहे हैं। वह कहते हैं कि विश्वयुद्ध होने का खतरा बढ़ रहा है। इससे अरबी देश एकजुट हो सकते हैं। भारत को इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

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