“ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की पहल रंग ला रही है। बैंक सखी सीमा देवी के प्रयासों से महिला समूह आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहे हैं।“
हाइलाइट्स :
- ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को मिला ज़मीनी आधार
- बैंक सखी मॉडल से महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास
- स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
कौशाम्बी। ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की प्रेरणा और सहयोग से चल रही योजनाएं अब गांवों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का गठन न केवल तेज़ी से बढ़ रहा है, बल्कि यह आंदोलन अब सामाजिक और आर्थिक बदलाव का मजबूत माध्यम भी बनता जा रहा है।
इसी क्रम में बैंक सखी सीमा देवी से हुई मुलाकात के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि अब दूरदराज़ के गांवों में भी महिलाएं बैंक फाइनेंस, बचत योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो चुकी हैं। बैंक सखी के माध्यम से महिलाएं सीधे बैंकिंग प्रणाली से जुड़ रही हैं और आर्थिक फैसले स्वयं लेने का आत्मविश्वास हासिल कर रही हैं।
सीमा देवी बताती हैं कि जब ग्रामीण महिलाएं अपने बीच से ही किसी महिला को आत्मनिर्भर बनते देखती हैं, तो उन्हें गहरी प्रेरणा मिलती है। यही प्रेरणा अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। परिणामस्वरूप अब महिला समूहों में नए सदस्यों को जोड़ना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।
इस पूरी पहल में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की भूमिका बेहद अहम रही है। बैंक के प्रबंधक श्री मयंक तिवारी के मार्गदर्शन में महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रियाओं, ऋण, बचत और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। बैंक सखी और बैंक प्रबंधन के संयुक्त प्रयासों से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
आज ये महिला समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, विश्वास और संस्थागत सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकती हैं और समाज के समग्र विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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