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“रायसीना डायलॉग 2026 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में किसी भी देश पर पूरी तरह से वैश्विक कब्ज़ा नहीं है। दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां शक्ति कई देशों में बंटी हुई है।”

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और बदलती अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा है कि आज की दुनिया में कोई भी देश खुद को पूरी तरह सर्वोच्च शक्ति नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World) की ओर बढ़ रही है, जहां शक्ति कई देशों और क्षेत्रों में बंटी हुई होगी।

दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue 2026 में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि 20वीं सदी के मध्य से जो विश्व व्यवस्था बनी थी, उसे हमेशा के लिए स्थिर मान लेना अवास्तविक सोच थी। उन्होंने कहा कि यदि पिछले 70 वर्षों को इतिहास के लंबे परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो यह भारत के हजारों साल के इतिहास का केवल एक छोटा सा हिस्सा है, इसलिए वैश्विक व्यवस्था का बदलना स्वाभाविक है।

बदल रहा है वैश्विक शासन का स्वरूप

विदेश मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनी, उससे दुनिया को कुछ स्थिरता जरूर मिली, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलती गईं। उनका कहना था कि आज वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर United States के इर्द-गिर्द किया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि शक्ति अब कई देशों में फैल चुकी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कोई भी देश ऐसा नहीं है जो अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, तकनीक और कूटनीति जैसे सभी क्षेत्रों में पूरी तरह से प्रभुत्व रखता हो।

तकनीक और जनसंख्या बदलाव के प्रमुख कारक

जयशंकर के अनुसार वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन के पीछे दो प्रमुख ताकतें काम कर रही हैं—तकनीक और जनसंख्या का बदलता स्वरूप। आने वाले वर्षों में यही दोनों कारक दुनिया की दिशा तय करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि आज ताकत का अर्थ केवल जीडीपी या सैन्य शक्ति नहीं रह गया है। अलग-अलग देश अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन अधिक व्यापक और बहुध्रुवीय होता जा रहा है।

वैश्विक तनाव के बीच भारत की भूमिका

विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे हालात में भारत संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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