Opposition warns before election results: Pappu Yadav says, "Die, but protest."

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले महागठबंधन नेताओं ने सड़कों पर उतरने, आंदोलन करने और हिंसा जैसे बयान दिए हैं। पप्पू यादव, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और मुकेश सहनी के बयानों से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पढ़ें पूरी विस्तार रिपोर्ट।

लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले माहौल अचानक गरमा गया है। महागठबंधन के प्रमुख नेताओं ने ऐसे बयान देने शुरू कर दिए हैं, जिनसे यह साफ संकेत मिलता है कि वे अपनी संभावित हार से बेचैन हैं और जनता को सड़क पर उतरने के लिए उकसा रहे हैं।

सवाल उठ रहा है—
क्या विपक्ष ने महसूस कर लिया है कि जनता का रुख उनके पक्ष में नहीं है?

पप्पू यादव का वायरल वीडियो—“जालिम सरकार में जीने से अच्छा है विरोध करते हुए मर जाना”

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का एक भड़काऊ वीडियो तेजी से वायरल हुआ है।
वीडियो में वह महागठबंधन समर्थकों से कहते दिख रहे हैं—

“तैयार रहो… सड़क पर उतरने के लिए, लाठी-गोली खाने के लिए भी। जालिम सरकार में जीने से अच्छा है विरोध करते हुए मर जाना।”

चुनावी प्रक्रिया के बीच ऐसा बयान सीधे-सीधे जनता को उकसाने वाला माना जा रहा है।

राहुल गांधी का जन-ज़ेड को उकसाने वाला आह्वान

कुछ दिन पहले हरियाणा चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने कथित “वोट चोरी” का आरोप लगाते हुए कहा था—

“अब फैसला देश का जेन जी करेगी। उन्हें इस व्यवस्था को बदलना होगा।”

यह बयान उस समय चर्चा में नहीं रहा, लेकिन पप्पू यादव के वीडियो के बाद इसकी गंभीरता बढ़ गई है।
अब माना जा रहा है कि विपक्ष के सभी नेता धीरे-धीरे एक ही नैरेटिव पर काम कर रहे हैं—हार पहले ही स्वीकार कर लो और माहौल गर्माओ।

तेजस्वी यादव का दावा—“धांधली नहीं हुई तो हमारी सरकार 18 नवंबर को बनेगी”

महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने भी सीधा संकेत दिया है कि अगर परिणाम उनके पक्ष में नहीं आते तो वह इसे “धोखा” बताएंगे।

तेजस्वी का बयान—

“14 को रिज़ल्ट आएगा तो महागठबंधन जीतेगा। 18 को हम शपथ लेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो समझिए जनमत से धोखा हुआ है।”

यह बयान भी स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग पर अविश्वास और माहौल को संवेदनशील बनाने वाला है।

मुकेश सहनी का विवादित बयान—

“हमारे कार्यकर्ता एनडीए नेताओं को दौड़ा-दौड़ा कर मारेंगे”

VIP पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने एक बेहद उग्र बयान देते हुए कहा—

“अगर धांधली की गई, तो हमारे कार्यकर्ता एनडीए नेताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटेंगे।”

चुनावी माहौल में हिंसा का खुला आह्वान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जा रहा है।

क्या विपक्ष हार की हताशा में उकसाऊ बयान दे रहा है?

इन सभी बयानों को एक साथ देखें तो कुछ बातें स्पष्ट होती हैं—

✔ विपक्ष को जनमत का रुख समझ आ गया है

मतदान के दो चरण पूरे होने के बाद विपक्ष को अंदेशा हो गया है कि जनता उनके पक्ष में नहीं है।

✔ संभावित हार को पहले ही “धांधली” बताने की तैयारी

रिज़ल्ट से पहले ही चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करना यही बताता है।

✔ जनता और युवाओं को सड़क पर उतारने का आह्वान

ये बयान चुनावी हार की हताशा और दबाव बनाने की रणनीति दिखाते हैं।

✔ लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला

इन बयानों से ऐसा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि अगर परिणाम पसंद नहीं आए, तो सड़कों पर संघर्ष होगा।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए राष्ट्रीय प्रस्तावना के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *