“प्रियंका गांधी मनरेगा बयान: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार पर योजनाओं के नाम बदलने, मनरेगा बजट घटाने और गरीबों के अधिकार कमजोर करने का आरोप लगाया।”
हाइलाइट्स :
- प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला
- योजनाओं के नाम बदलने को बताया पैसे की बर्बादी
- मनरेगा में 100 दिन के रोजगार अधिकार कमजोर होने का आरोप
- मजदूरी बढ़ाए बिना काम के दिन बढ़ाने पर सवाल
- ग्राम पंचायतों के अधिकार खत्म करने का दावा
नई दिल्ली। प्रियंका गांधी मनरेगा बयान को लेकर केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस महासचिव और सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने मनरेगा से जुड़े नए बिल और सरकारी नीतियों पर तीखा हमला बोला है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि “मोदी सरकार द्वारा योजनाओं के नाम बदलने की सनक मुझे समझ नहीं आती।” उन्होंने सवाल उठाया कि योजनाओं के नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जबकि उसी पैसे से गरीबों को सीधे लाभ दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत गरीबों को 100 दिन के रोजगार का अधिकार दिया गया था, लेकिन सरकार का नया बिल इस अधिकार को कमजोर करेगा। प्रियंका गांधी के मुताबिक, बिल में दो-तीन ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनसे ऊपर-ऊपर ऐसा लगता है कि काम के दिन बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन मजदूरी बढ़ाने पर सरकार चुप है।
कांग्रेस महासचिव ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा का बजट हर साल घटाया है, जिससे ग्रामीण गरीबों और मजदूरों को सीधा नुकसान हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नए बिल में ग्राम पंचायतों के अधिकार भी समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की क्षमता कमजोर होगी।
प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों का कानूनी अधिकार है, और सरकार की नीतियां इस अधिकार को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में जा रही हैं।
