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Vande Mataram 150 समारोह में PM मोदी ने सदन में कहा कि “यहां कोई नेतृत्व नहीं, कोई विपक्ष नहीं है।” प्रधानमंत्री ने वंदेमातरम को देश की एकता की धड़कन बताते हुए 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प को दोहराने की अपील की। पूरी खबर पढ़ें ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ पर।

नई दिल्ली। संसद परिसर में वंदेमातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ऐसा बयान दिया जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। पीएम मोदी ने कहा—
“यहां कोई लीडरशिप नहीं, कोई विपक्ष नहीं है। हम सब वंदेमातरम के प्रति आभार व्यक्त करने और उसका कर्ज स्वीकारने के लिए यहां हैं।”

प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य को केवल एक टिप्पणी नहीं बल्कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को लेकर सीधा संदेश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम वह शक्ति है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में देश को एकजुट किया और आज फिर उसी भाव की आवश्यकता है।

वंदेमातरम: एक गीत नहीं, राष्ट्रीय चेतना का आधार—PM मोदी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि
“वंदेमातरम ने देश को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जोड़ने का कार्य किया। यह गीत केवल आवाज नहीं, स्वाधीनता संग्राम के समय की आत्मा था।”

उन्होंने कहा कि आज भारत एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, और ऐसे समय में वंदेमातरम की भावना हमें फिर से राष्ट्र निर्माण की दिशा में केंद्रित करती है।

विपक्ष की अनुपस्थिति पर तंज—“नेतृत्व भी नहीं, विपक्ष भी नहीं”

PM मोदी के कथन—
“यहां न लीडरशिप है, न विपक्ष”
—को सियासी हलकों में विपक्ष पर तीखे तंज के रूप में देखा जा रहा है।

हाल के सत्रों में विपक्ष की रणनीति, सीटों की संख्या और सदन में उनकी उपस्थिति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस मंच से यह बात कहकर राजनीतिक संदेश को और अधिक स्पष्ट कर दिया।

2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

मोदी ने कहा कि आज भारत को 2047 के लिए लक्ष्य तय करना चाहिए।

“वंदेमातरम हमें प्रेरित करता है कि हम 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के संकल्प को फिर दोहराएं। यही समय है एकजुट होने का, साथ चलने का।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत का विश्व नेतृत्व में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी युवाओं, नीति निर्माताओं और हर नागरिक की है।

कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और साहित्य की झलक

समारोह में वंदेमातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को याद किया गया।
विभिन्न सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और कलाकारों ने वंदेमातरम के ऐतिहासिक महत्व, साहित्यिक गरिमा और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान कई प्रदर्शनी और स्मृति-चित्र भी लगाए गए, जिनमें वंदेमातरम के 150 वर्ष की यात्रा को दर्शाया गया।

राजनीतिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व का संगम

इस कार्यक्रम को सरकार ने केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि देश की राजनीतिक दिशा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला संदेश माना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह भाषण 2047 के रोडमैप और आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा संकेत है।

संसद से जनता तक—एकता का संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का समापन इन शब्दों के साथ किया—
“यह हमारा समय है। देश को जोड़ने का, सपनों को पूरा करने का, और आने वाली पीढ़ियों के लिए विकसित भारत का रास्ता तैयार करने का।”

वंदेमातरम के 150 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन आने वाले वर्षों में भारत की नई विकास कथा का प्रतीक माना जा रहा है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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