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जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि ‘जब तक जुल्म होगा, तब तक जिहाद होगा’। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। मदनी ने ज्ञानवापी और मथुरा विवाद का भी उल्लेख किया।

नई दिल्ली । जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक कार्यक्रम में विवादित बयान देते हुए कहा कि “जब जुल्म होगा, तब जिहाद होगा”। उनका कहना है कि जिहाद को गलत तरीके से हिंसा के रूप में पेश किया गया है, जबकि यह मुसलमानों के लिए एक पवित्र कर्तव्य है।

सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर सवाल

मदनी ने ज्ञानवापी और मथुरा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि:

  • सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट कहलाने का अधिकार नहीं है।”
  • “अदालतें सरकारों के दबाव में काम कर रही हैं।”

उनका कहना है कि बड़े धार्मिक और ऐतिहासिक विवादों में न्यायपालिका को निष्पक्ष और स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए।

जिहाद को हिंसा से जोड़ने पर आपत्ति

मदनी ने कहा कि:

  • इस्लाम के दुश्मनों ने जिहाद को केवल हिंसा, आतंक और उग्रवाद का पर्याय बताने की कोशिश की।
  • जबकि जिहाद का मूल अर्थ अन्याय, अत्याचार और जुल्म के खिलाफ संघर्ष है।
  • उन्होंने इसे “आध्यात्मिक और नैतिक कर्तव्य” बताया।

ज्ञानवापी–मथुरा मामलों का संदर्भ

मदनी ने हालिया धार्मिक विवादों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि:

  • न्यायपालिका को इन मामलों में संवैधानिक मूल्यों के तहत कार्य करना चाहिए,
  • और किसी भी पक्ष के दबाव में नहीं आना चाहिए।

उनके इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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