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रायबरेली (उत्तर प्रदेश) की मनीषा रावत ने पीएम मुद्रा योजना के तहत लोन लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और आत्मनिर्भर बनीं। जानिए कैसे सरकारी योजना ने बदली उनकी आर्थिक स्थिति। “:

मुख्य बिंदु:

  • रायबरेली की मनीषा रावत ने पीएम मुद्रा योजना से लिया लोन
  • छोटे स्तर से शुरू किया व्यवसाय, आज बन चुकी हैं आत्मनिर्भर
  • परिवार की आर्थिक स्थिति में आया सुधार
  • महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं

रायबरेली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने एक बार फिर ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। रायबरेली की मनीषा रावत ने इस योजना के तहत ऋण लेकर न केवल अपना स्वरोजगार शुरू किया, बल्कि आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

सीमित संसाधन, बड़ा सपना

मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली मनीषा रावत के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की कमी थी। वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत बिना गारंटी के लघु ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

मनीषा ने बैंक में आवेदन कर ‘शिशु’ श्रेणी के अंतर्गत ऋण प्राप्त किया और घर से ही सिलाई व रेडीमेड परिधान का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी।

कारोबार में हुआ विस्तार

शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहीं मनीषा ने गुणवत्ता और समयबद्ध डिलीवरी पर ध्यान दिया। मांग बढ़ने पर उन्होंने ‘किशोर’ श्रेणी में दोबारा ऋण लेकर नई मशीनें खरीदीं और अपने व्यवसाय का विस्तार किया। आज उनके साथ दो अन्य महिलाएं भी काम कर रही हैं, जिससे उन्हें भी रोजगार मिला है।

मनीषा बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन अब घर की आय में स्थिरता आई है। बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान हो गया है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

स्थानीय बैंक अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। इस योजना ने छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।

योजना के तहत शिशु, किशोर और तरुण श्रेणियों में क्रमशः 50 हजार रुपये तक, 5 लाख रुपये तक और 10 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है।

सरकार की मंशा को मिल रहा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इससे न केवल बेरोजगारी कम हो रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी मजबूती मिल रही है।

मनीषा रावत की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा और आर्थिक सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज और परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं।

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