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US Supreme Court Trump Tariff India फैसले के बाद भारत पर लागू टैरिफ 18% से घटकर 10% कर दिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए आदेश के अनुसार 24 फरवरी 2026 से भारतीय सामानों पर केवल 10% अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगेगा। जानें पूरा अपडेट, ट्रेड डील और भारत-अमेरिका व्यापार पर असर।

हाइलाइट्स :

  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित किया
  • 24 फरवरी 2026 से भारतीय सामानों पर 10% अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज
  • पहले 18% तक था प्रभावी शुल्क
  • 150 दिनों के लिए लागू रहेगा नया आदेश
  • भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 186 बिलियन डॉलर तक पहुंचा

नई दिल्ली। अमेरिका की सर्वोच्च अदालत US Supreme Court ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में 6-3 के बहुमत से दिए गए इस निर्णय ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आर्थिक एजेंडे को झटका दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारत पर लागू प्रभावी अतिरिक्त शुल्क अब 18 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो गया है।

क्या था पूरा मामला?

ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत सहित कई देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। बाद में रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर 25 प्रतिशत और जोड़ा गया, जिससे कुल प्रभावी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।

हालांकि फरवरी की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ, जिसके तहत यह प्रभावी शुल्क घटाकर लगभग 18 प्रतिशत कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति द्वारा वैश्विक स्तर पर इतने बड़े टैरिफ लगाना अधिकार क्षेत्र से बाहर था और यह संविधान के अनुरूप नहीं है। अदालत ने माना कि इस तरह का व्यापक आर्थिक कदम कांग्रेस की अनुमति के बिना नहीं उठाया जा सकता।

फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एक नया आदेश जारी किया, जिसके तहत अमेरिका में आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ लगाया गया है। यह आदेश 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।

अब भारत पर कितना लगेगा टैरिफ?

नई व्यवस्था के तहत भारतीय सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी सरचार्ज लागू होगा। यह मौजूदा MFN (Most Favoured Nation) ड्यूटी के अतिरिक्त लगेगा।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी उत्पाद पर पहले 5 प्रतिशत MFN ड्यूटी लगती थी, तो अब उस पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ा जाएगा और कुल प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत होगा।

पहले यही गणना 5 प्रतिशत + 25 प्रतिशत के आधार पर 30 प्रतिशत तक पहुंच रही थी। इस लिहाज से भारतीय निर्यातकों को महत्वपूर्ण राहत मिली है।

व्यापार पर क्या होगा असर?

वाणिज्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत के निर्यात क्षेत्र—विशेषकर टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स और जेम्स-एंड-ज्वेलरी—को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है, जबकि आयात में यह 6.22 प्रतिशत और कुल व्यापार में 10.73 प्रतिशत है। 2021 से 2025 के बीच अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा।

ट्रंप प्रशासन का तर्क

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अमेरिका 2024 में 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार घाटे का सामना कर रहा था, जो 2008 के बाद सबसे अधिक है। प्रशासन का मानना है कि अस्थायी आयात शुल्क से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, डॉलर के बहिर्वाह को रोका जा सकेगा और व्यापार संतुलन सुधरेगा।

आगे क्या?

यह 10 प्रतिशत अस्थायी आयात सरचार्ज 150 दिनों तक लागू रहेगा। यदि अमेरिकी कांग्रेस इसे आगे बढ़ाती है तो अवधि बढ़ सकती है, अन्यथा यह स्वतः समाप्त हो जाएगा।

फिलहाल भारतीय निर्यातकों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि 18 प्रतिशत के मुकाबले 10 प्रतिशत शुल्क से उनकी लागत घटेगी और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

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