UP Panchayat Election 2026, Uttar Pradesh Panchayat Chunav, OBC Reservation Commission UP, Allahabad High Court order Panchayat, Yogi Government affidavit news, Lucknow political news, UP Local Body Election delay,यूपी पंचायत चुनाव 2026 अपडेट, ओबीसी आरक्षण आयोग उत्तर प्रदेश, लखनऊ हाईकोर्ट खबर, UP political breaking news, Gram Panchayat Election UP,UP Panchayat Election 2026 Lucknow Uttar Pradesh political news, Allahabad High Court Lucknow Bench order news UP, OBC reservation commission Uttar Pradesh governance news, Gram Panchayat Election delay Lucknow district political update, Uttar Pradesh state election administrative news,up-panchayat-election-2026-delay-allahabad-high-court-obc-reservation

UP Panchayat Election 2026 जून से पहले संभव नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद समर्पित ओबीसी आयोग गठन और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया जारी। योगी सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया। पढ़ें पूरी राजनीतिक रिपोर्ट।

हाइलाइट्स:

  • UP Panchayat Election 2026 जून से पहले नहीं होने की संभावना
  • Allahabad High Court के आदेश के बाद OBC आयोग गठन जरूरी
  • योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा दायर किया
  • पिछड़ा वर्ग आरक्षण आयोग की रिपोर्ट के बाद तय होगा कोटा
  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी रणनीति पर असर

अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी सम्पादक

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब अपने निर्धारित समय अप्रैल 2026 में होने की संभावना नहीं है। ताजा घटनाक्रम और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि चुनाव जून 2026 से पहले नहीं कराए जा सकेंगे।

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अनिवार्य

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाए। यही आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का वैज्ञानिक आधार तय करेगा और अपनी संस्तुतियां सरकार को देगा। उन संस्तुतियों के आधार पर ही सीटों का आरक्षण निर्धारित होगा।

सूत्रों के अनुसार आयोग के गठन और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। ऐसे में अप्रैल में प्रस्तावित चुनाव अब जून या उसके बाद ही संभव दिख रहे हैं।

सरकार का हलफनामा

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में हलफनामा दाखिल कर अदालत के आदेश का पालन करने का आश्वासन दिया है। यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया था, जिसमें मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने अदालत में कहा था कि छह सदस्यीय समर्पित ओबीसी आयोग के गठन का प्रस्ताव पिछले पांच माह से अधिक समय से मंत्रिमंडल के समक्ष लंबित है। बिना समर्पित आयोग के पिछड़ों का आरक्षण सही तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय किया जाएगा।

अप्रैल 2026 में थे प्रस्तावित चुनाव

प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हर पांच वर्ष में होते हैं। पिछला चुनाव अप्रैल 2021 में हुआ था, इसलिए अगला चुनाव अप्रैल 2026 में संभावित था।

हालांकि, अब निम्न कारणों से देरी तय मानी जा रही है—

  • ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया
  • एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन)
  • अप्रैल में बोर्ड परीक्षाएं, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगती है

इन परिस्थितियों में अप्रैल में चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है।

राजनीतिक चर्चा भी तेज

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि पंचायत चुनाव वर्ष के उत्तरार्ध में होते हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसका राजनीतिक असर भी दिख सकता है।

फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद स्थिति स्पष्ट है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना पंचायत चुनाव संभव नहीं होंगे।

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब जून 2026 के बाद ही कराए जाने की संभावना प्रबल है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *