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“सुप्रीम कोर्ट ने UGC (University Grants Commission) के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि फिलहाल सभी छात्र और शिक्षक एक छत के नीचे रह रहे हैं, इसलिए नए नियम तुरंत लागू नहीं होने चाहिए।

नई दिल्ली। इस फैसले से छात्रों और शिक्षकों को अस्थायी सुरक्षा मिली है, जबकि UGC को निर्देश दिया गया है कि वह इन नियमों पर पुनर्विचार करे और शिक्षण संस्थानों में संघर्ष या असमंजस की स्थिति पैदा न हो।

कोर्ट का बयान

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों के जल्दबाजी में लागू करने से शैक्षणिक व्यवस्था में भ्रम और टकराव हो सकता है। अदालत ने यह सुनिश्चित करने की मांग की कि नियमों का असर किसी पर नकारात्मक रूप से न पड़े

शिक्षा जगत में राहत

इस स्टे आदेश के बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक और छात्र फिलहाल अपने अधिकार और जिम्मेदारियों के तहत सामान्य ढंग से कार्य कर सकते हैं। कोर्ट ने UGC से कहा कि नियम बनाने और लागू करने से पहले सभी हितधारकों की राय ली जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 29 जनवरी 2026 को UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। ये याचिकाएँ मुख्य रूप से जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा से संबंधित हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि UGC ने गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है, जिससे कुछ छात्रों और वर्गों को संस्थागत सुरक्षा और अवसरों से बाहर रखा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि वह केवल संवैधानिकता और वैधता के आधार पर जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता और समरसता बनी रहे।

SC की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • “अभी तो सभी एक छत के नीचे रह रहे हैं, लेकिन संस्थानों में भेदभाव या असमानता नहीं होनी चाहिए।”
  • शिक्षण संस्थानों में सभी समुदायों के लिए समान अवसर और समरसता बनाए रखने पर जोर।

याचिकाओं का आधार

  • UGC नियम जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा समान और समावेशी नहीं
  • इससे कुछ छात्रों को संस्थागत सुरक्षा से वंचित किया जा सकता है।
  • नियम का पालन करने पर शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक असमानता पैदा होने की आशंका।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और जल्द संवैधानिकता और वैधता पर फैसला देने का संकेत दिया।

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