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पश्चिम बंगाल SIR विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। CJI सूर्यकांत ने Article 32 के तहत दायर याचिका पर नाराजगी जताई। वहीं निर्वाचन आयोग ने 7 अधिकारियों को निलंबित किया। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होगी। पढ़ें पूरी खबर..

हाईलाइट :

  • पश्चिम बंगाल SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी
  • Article 32 के तहत दायर याचिका पर नाराजगी
  • निर्वाचन आयोग ने 7 अधिकारियों को निलंबित किया
  • अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को होगी प्रकाशित

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “आर्टिकल 32 में आप चाहते हैं कि हम यह तय करें कि आपके पिता, माता आदि कौन हैं। यह आर्टिकल 32 याचिका का मजाक है।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद जिमफरहाद नोवाज ने याचिका दाखिल कर पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ के इस्तेमाल को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं की पहचान और विवरण को लेकर गंभीर विसंगतियां हैं।

28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची

पीटीआई के अनुसार, राज्य निर्वाचन अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अंतिम मतदाता सूची अब 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। नामों की बर्तनी और अन्य विसंगतियों से जुड़ी सुनवाई 27 दिसंबर से चल रही है। दस्तावेजों की जांच 21 फरवरी तक पूरी की जाएगी।
SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 58 लाख नाम—जिनमें मृत, दोहराव या स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं—को मसौदा सूची से बाहर रखा गया था। पहले अंतिम सूची 14 फरवरी को जारी होनी थी, जिसे बढ़ाकर 28 फरवरी कर दिया गया।

ECI का सात अधिकारियों पर एक्शन

इस बीच भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और SIR प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर इसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।

आयोग ने यह भी कहा है कि बीएलओ को बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाए और SIR के दौरान जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। राज्य सरकार को 17 फरवरी तक इन निर्देशों के पालन की जानकारी देनी है।

SIR को लेकर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। अब सुप्रीम कोर्ट में हुई तीखी टिप्पणी के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

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