“Supreme Court में सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील मैथ्यूज नेदुम्पारा को सख्त चेतावनी दी। अंबानी-अडानी का जिक्र करने पर CJI ने कहा कि उनकी अदालत में बदतमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला कॉलेजियम सिस्टम और NJAC से जुड़ी याचिका का है। “जानिए पूरी खबर…
हाइलाइट्स :
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस
- CJI सूर्यकांत ने वकील को दी चेतावनी
- अंबानी-अडानी का जिक्र करने पर नाराजगी
- कॉलेजियम सिस्टम और NJAC पर उठा मुद्दा
- पहले भी लग चुकी है फटकार
नई दिल्ली। Supreme Court of India में सोमवार को एक सुनवाई के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब देश के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने एक वरिष्ठ वकील की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत में अंबानी-अदाणी का संदर्भ आने पर सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे कोर्ट में बदतमीजी नहीं चलेगी।”
घटना ने न्यायालय की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और भाषा की सीमाओं पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
क्या था मामला?
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्पारा ने सीजेआई की पीठ के समक्ष एक याचिका का उल्लेख किया। इस याचिका में न्यायपालिका की कॉलेजियम प्रणाली को चुनौती देते हुए जजों की नियुक्ति के लिए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन (NJAC) को लागू करने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कोई याचिका रजिस्ट्री में पंजीकृत नहीं है। इस पर अधिवक्ता ने असंतोष व्यक्त करते हुए टिप्पणी की कि “अदाणी और अंबानी के मामलों में संविधान पीठ गठित हो जाती है, लेकिन आम लोगों के मुद्दों पर सुनवाई तक नहीं होती।”
यही टिप्पणी विवाद का कारण बनी।
सीजेआई की कड़ी प्रतिक्रिया
वकील की इस टिप्पणी पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने तत्काल आपत्ति जताई। उन्होंने अधिवक्ता को चेतावनी देते हुए कहा:
“मिस्टर नेदुम्पारा, आप मेरी अदालत में जो कह रहे हैं, उसे सोच-समझकर बोलिए। आपने मुझे चंडीगढ़ में भी देखा है, दिल्ली में भी। यह मत सोचिए कि जैसे आप दूसरी पीठों के साथ बदतमीजी करते रहे हैं, वैसे ही यहां भी कर पाएंगे। मैं आपको चेतावनी देता हूं।”
सीजेआई की इस सख्त टिप्पणी के बाद अदालत में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया।
पहले भी हो चुका है विवाद
गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्पारा को न्यायालय की नाराजगी झेलनी पड़ी हो। पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने भी उन्हें फटकार लगाई थी। उस दौरान उन्होंने कहा था, “कोर्ट में राजनीतिक भाषण मत दीजिए।”
NJAC विवाद की पृष्ठभूमि
नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन (NJAC) का मुद्दा पहले भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहा है। वर्ष 2015 में सर्वोच्च अदालत ने 99वें संविधान संशोधन को निरस्त करते हुए कॉलेजियम प्रणाली को बरकरार रखा था। इसी आधार पर रजिस्ट्री ने नई याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए पंजीकरण से इनकार किया था।
अदालत की गरिमा और मर्यादा पर सवाल
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान भाषा और आचरण की मर्यादा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। न्यायपालिका पर टिप्पणी करते समय अधिवक्ताओं को संयम बरतना आवश्यक है, ताकि न्यायालय की गरिमा बनी रहे।
सोमवार की इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सर्वोच्च अदालत में कार्यवाही के दौरान अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार की तीखी या असंयमित टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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