“महाशिवरात्रि 2026 से पहले बाबा विश्वनाथ को देशभर के मंदिरों से विशेष उपहार मिल रहे हैं। वैष्णो देवी, मथुरा, सिद्धिविनायक और दक्षिण भारत के 20 से अधिक मंदिर शामिल।”
हाइलाइट्स :
- महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, उससे पहले काशी में उत्सव का माहौल
- माता वैष्णो देवी, मथुरा और सिद्धिविनायक मंदिर से विशेष उपहार
- दक्षिण भारत के 20 से अधिक मंदिर अभियान से जुड़े
- काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की अनूठी पहल
- सनातन परंपराओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम
वाराणसी। महाशिवरात्रि 2026 से पहले काशी में शिवभक्ति का अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। बाबा विश्वनाथ को देशभर के प्रमुख मंदिरों से विशेष उपहार भेजे जा रहे हैं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक प्रयास भी बनती जा रही है।
सबसे पहले माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से विशेष भेंट बाबा विश्वनाथ को भेजी गई। इसके बाद मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भगवान विश्वनाथ और माता पार्वती के लिए वस्त्र, मेवे, मिठाइयां और पूजन सामग्री काशी पहुंची।
12 फरवरी को सिद्धिविनायक मंदिर का विशेष उपहार
इस क्रम में 12 फरवरी को मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणेश मंदिर से भी विशेष उपहार काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचने वाला है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और असम के मंदिरों से भी महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष भेंट भेजी जा रही है।
दक्षिण भारत के 20 से अधिक मंदिर हुए शामिल
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि यह पहल एक नवाचार के रूप में शुरू की गई थी, लेकिन इसका अप्रत्याशित रूप से देशभर में सकारात्मक प्रतिसाद मिला।
उन्होंने कहा कि रामेश्वरम के साथ पवित्र जल के आदान-प्रदान से शुरू हुई यह परंपरा अब देशव्यापी स्वरूप ले चुकी है।
उनके अनुसार अब तक दक्षिण भारत के 20 से अधिक मंदिरों से उपहार भेजे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जो महाशिवरात्रि से पहले काशी पहुंच जाएंगे।
सनातन परंपरा को पुनर्जीवित करने की पहल
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि पहले भी मंदिरों के बीच इस प्रकार की परंपराएं थीं, लेकिन समय के साथ यह बंद हो गई थीं। अब जिस उत्साह से देशभर के मंदिर जुड़ रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी मजबूत हैं।
उन्होंने बताया कि जिस उत्साह से उपहार आ रहे हैं, उसी भाव से काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से भी संबंधित मंदिरों को भेंट भेजी जा रही है, ताकि यह परंपरा निरंतर बनी रहे।
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