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Delhi Excise Policy Case में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में आरोपमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आपराधिक षड्यंत्र के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। जानें पूरा मामला, जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया।

नई दिल्ली। बहुचर्चित दिल्ली आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत अन्य आरोपियों को सीबीआई केस में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया कोई आपराधिक षड्यंत्र स्थापित नहीं होता।

हालांकि, केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। यह फैसला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज मामले में आया है।

कोर्ट का फैसला और कानूनी स्थिति

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने 12 फरवरी को आरोप तय करने के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रखा था। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट और पूरक आरोपपत्रों में आरोप लगाया था कि तथाकथित “साउथ लॉबी” ने आबकारी नीति को अपने पक्ष में प्रभावित कराने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी। वहीं बचाव पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एजेंसी इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

फैसले के बाद भावुक हुए केजरीवाल

अदालत से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा, “मैं भ्रष्ट नहीं हूं। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है।”

उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सच की हमेशा जीत होती है।”

इस दौरान मनीष सिसोदिया उनके साथ मौजूद रहे और समर्थकों ने नारेबाजी भी की।

बचाव पक्ष की दलीलें

केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि:

  • उनके मुवक्किल के खिलाफ रिश्वत लेने या मांगने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
  • पहली चार्जशीट और तीन पूरक चार्जशीट में केजरीवाल का नाम नहीं था।
  • चौथी पूरक चार्जशीट में नाम जोड़ा गया, जो पहले के आरोपों का दोहराव मात्र है।
  • अप्रूवर बने राघव मगुंटा के बयान से भी कोई सीधा लिंक स्थापित नहीं होता।

मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने भी सभी आरोपों को राजनीतिक प्रेरित और तथ्यों से परे बताया।

क्या है दिल्ली आबकारी नीति मामला?

कोरोना काल के दौरान दिल्ली सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए नई आबकारी नीति लागू की थी। इस नीति का उद्देश्य शराब बिक्री प्रणाली में सुधार, सरकारी राजस्व बढ़ाना और कथित रूप से माफिया नियंत्रण समाप्त करना बताया गया था।

हालांकि, नीति के लागू होने के बाद अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लगे। दिल्ली के उपराज्यपाल की सिफारिश पर सीबीआई जांच शुरू हुई। बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने बाद में इस नीति को रद्द कर दिया।

जांच की शुरुआत कैसे हुई?

  • अगस्त 2022 में सीबीआई ने 15 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
  • आरोप था कि नीति निर्माण और लाइसेंस वितरण में नियमों का उल्लंघन किया गया।
  • इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अलग से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

सीबीआई और ईडी जांच में अंतर

  • सीबीआई की जांच: नीति निर्माण और क्रियान्वयन में कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं और साजिश के पहलुओं पर केंद्रित।
  • ईडी की जांच: कथित अवैध धन के प्रवाह और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच।

राजनीतिक असर

इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, खासकर उस समय जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने कहा है कि अंतिम निर्णय उच्च न्यायालयों में अपील के बाद स्पष्ट होगा।

सीबीआई द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर किए जाने की संभावना है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई और अदालत की सुनवाई आगे की कानूनी दिशा तय करेगी।

फिलहाल, राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में बड़ी राहत मिल गई है।

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