एक देश एक चुनाव, विधि आयोग रिपोर्ट, संविधान संशोधन, लोकसभा कार्यकाल बदलाव, विधानसभा कार्यकाल, संयुक्त समिति रिपोर्ट, One Nation One Election, चुनाव सुधार भारत, चुनावी खर्च कमी, राजनीतिक स्थिरता भारत, One Nation One Election, Law Commission Report India, Constitutional Amendment India, Lok Sabha tenure change, State Assembly tenure change, Election reforms India, Simultaneous elections India, Parliament joint committee report, Political stability India, Reduce election cost India, #OneNationOneElection, #Vidhayog, #LawCommission, #ConstitutionAmendment, #LokSabha, #Vidhansabha, #ElectionReform, #IndianPolitics, #BreakingNews, #BigUpdate, एक देश एक चुनाव ताज़ा खबर, विधि आयोग की रिपोर्ट का असर, चुनाव सुधार की बड़ी अपडेट, संसद कार्यकाल बदलने का प्रस्ताव, राष्ट्रीय चुनाव मॉडल भारत, One Nation One Election latest update, Law Commission recommendation, Constitutional amendment proposal India, Parliament tenure change news, Simultaneous elections update,

विधि आयोग ने कहा कि संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं के 5 साल के कार्यकाल में बदलाव संभव है। ‘एक देश, एक चुनाव’ मॉडल को बड़ा समर्थन।

मनोज शुक्ला
विशेष संवाददाता

देश में लंबे समय से चर्चा में रहे ‘एक देश, एक चुनाव’ मॉडल पर अब महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई दे रही है। भारत के विधि आयोग ने संसद की संयुक्त समिति को स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हित में आवश्यक होने पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पाँच वर्ष के कार्यकाल में संशोधन संभव है।

विधि आयोग का स्पष्ट मत

विधि आयोग ने समिति को बताया कि भारतीय संविधान संसद को यह शक्ति देता है कि वह संविधान संशोधन के माध्यम से कार्यकाल में परिवर्तन कर सकती है।
आयोग के अनुसार—

  • इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता,
  • प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुविधा,
  • और लगातार चुनावों से होने वाले व्यवधानों और खर्च की कटौती होना चाहिए।

आयोग ने माना कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

कौन से अनुच्छेद बदलने होंगे?

कार्यकाल में बदलाव के लिए दो प्रमुख अनुच्छेदों में संशोधन आवश्यक है—

  • अनुच्छेद 83(2) – लोकसभा का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 172(1) – राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल

संशोधन के बाद संसद चुनावी चक्र को एक समान कर सकेगी या जरूरत अनुसार अवधि में बदलाव कर सकती है।

संशोधन की जरूरत क्यों महसूस हुई?

विधि आयोग ने तर्क दिया कि भारत में लगभग हर वर्ष किसी न किसी राज्य या केंद्र में चुनाव होते रहते हैं। इससे—

  • सरकारी विभागों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है,
  • सुरक्षा बलों की लंबी तैनाती होती है,
  • आदर्श आचार संहिता बार-बार लागू होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं,
  • और चुनावी खर्च में भारी वृद्धि होती है।

एकसाथ चुनाव इन समस्याओं को कम कर सकता है।

संयुक्त समिति की मौजूदा भूमिका

सरकार द्वारा गठित संयुक्त समिति वर्तमान में ‘एक देश, एक चुनाव’ की—

  • व्यवहारिकता,
  • संवैधानिक आवश्यकता,
  • राजनीतिक सहमति,
  • और प्रशासनिक तैयारियों
    का अध्ययन कर रही है।

विधि आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद समिति अपनी अंतिम सिफारिश संसद को सौंपेगी।

क्या बदल सकता है आगे?

यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं, तो—

  • लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराए जा सकते हैं,
  • चुनावी खर्च में बड़ी कमी आएगी,
  • प्रशासनिक व्यवधान घटेंगे,
  • और शासन में अधिक स्थिरता आ सकती है।

सरकार भी इसे व्यापक चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

राजनीतिक मतभेद भी बरकरार

कुछ विपक्षी दल और संवैधानिक विशेषज्ञ इस प्रस्ताव को लेकर संशय में हैं। उनके अनुसार—

  • राज्यों के अधिकार कमजोर पड़ सकते हैं,
  • अस्थिर राजनीतिक परिस्थितियों में समय से पहले चुनाव का संकट बढ़ सकता है,
  • और संवैधानिक प्रक्रियाओं में जटिलताएँ सामने आ सकती हैं।

इन्हीं कारणों से इस विषय पर सर्वसम्मति बनना अभी चुनौतीपूर्ण है।

आगे की संभावनाएँ

सरकार विधि आयोग की राय को महत्वपूर्ण संकेत मान रही है।
जानकारों का अनुमान है कि समिति की रिपोर्ट के बाद संसद में संविधान संशोधन बिल लाया जा सकता है, जिससे ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *