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“उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में ग्रामीणों के शरीर में घातक क्रोमियम पाया गया। 90,000 मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप के कारण स्वास्थ्य संकट बढ़ा, एनजीटी और स्थानीय प्रशासन जांच में जुटे हैं।”

हाइलाइट्स:

  • खानचंद्रपुर में औद्योगिक कचरे से भूगर्भ जल दूषित
  • पालपुरवा में 104 लोगों के शरीर में क्रोमियम की पुष्टि
  • चार दिन चले स्वास्थ्य शिविर में लिया गया रक्त और पेशाब का नमूना
  • हैंडपंप के पानी का उपयोग मना, मवेशियों के लिए भी चेतावनी
  • क्रोमियम से कैंसर, फेफड़े, किडनी और लिवर पर असर

कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश)। जिले के खानचंद्रपुर गांव और आस‑पास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के शरीर में क्रोमियम (Hexavalent Chromium) जैसे खतरनाक रसायन के बढ़े हुए स्तर पाए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। यह समस्या मुख्य रूप से इलाके में पड़े 90,000 मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप से जुड़ी बताई जा रही है, जिससे भूजल और मिट्टी में रसायन फैल चुका है।

स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए गए परीक्षणों में ग्रामीणों के खून के नमूनों में क्रोमियम की मात्रा सामान्य सीमा से कहीं अधिक पाई गई है। एनजीटी (National Green Tribunal) के निर्देशों के तहत कई महीनों से यहां स्वास्थ्य जांच और सैंपलिंग अभियान जारी है। पिछले आंकड़ों के अनुसार, 100 से अधिक ग्रामीणों के रक्त में मानक से अधिक क्रोमियम मिला है, और सैंपलिंग का काम जारी है।

ग्रामीणों ने बताया है कि पिछले कुछ समय से त्वचा पर जलन, चकत्ते, आंखों में जलन, सांस की तकलीफ जैसे लक्षण बढ़े हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रोमियम‑6 जैसा रसायन पानी और मिट्टी के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में पानी की जांच, रक्त परीक्षण, और सुरक्षित पानी की आपूर्ति जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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