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जूना अखाड़ा निष्कासन: हरिद्वार के जूना अखाड़े ने अर्द्धकुंभ 2027 को लेकर कथित अमर्यादित बयानबाजी के आरोप में महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी और महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरी को निष्कासित किया।

Highlights

  • जूना अखाड़ा निष्कासन: दो वरिष्ठ संतों पर कार्रवाई
  • महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी और प्रबोधानंद गिरी महाराज निष्कासित
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बैठक को लेकर विवाद
  • अखाड़ा प्रशासन ने मर्यादा उल्लंघन पर कड़ा निर्णय लिया
  • अखिल भारतीय आश्रम परिषद का गठन

हरिद्वार। जूना अखाड़ा निष्कासन: अर्द्धकुंभ 2027 को दिव्य और भव्य रूप से आयोजित कराने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक पर सवाल उठाने और अखाड़े की परंपरागत मर्यादा के खिलाफ कथित बयानबाजी करने के आरोप में जूना अखाड़े ने दो वरिष्ठ संतों को निष्कासित कर दिया है।

निष्कासित संत:

  • महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज
  • महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज

अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती महाराज ने बताया कि जूना अखाड़ा संत परंपरा, मर्यादा और सामाजिक आचरण के उच्च आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा के मूल्यों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को पद या प्रभाव का संरक्षण नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य संतों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

इस विवाद के चलते अखाड़ों के अन्य आश्रमधारी और स्थानधारी संतों ने अखिल भारतीय आश्रम परिषद के गठन की घोषणा की। संतों ने कहा कि बैठक में सभी संतों को शामिल नहीं किया गया, जिससे कुछ संत नाराज हुए।

अखाड़ा प्रशासन ने कहा कि दोनों संतों ने सरकार और प्रशासन के विरोध में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और अर्द्धकुंभ मेला प्रभावित करने की कोशिश की। स्वामी प्रबोधानंद गिरी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

श्रीमहंत मोहन भारती ने कहा, अखाड़ा परंपरा और मर्यादा की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। किसी भी सनातन विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद संत समाज और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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