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न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने भानवी सिंह की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में लंबित है और शीघ्र निपटान के लिए वहीं आग्रह किया जा सकता है।

नई दिल्ली। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भानवी सिंह द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि यह मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय (High Court) में लंबित है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले का त्वरित निपटान उच्च न्यायालय के समक्ष ही किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता उस मंच पर शीघ्र सुनवाई के लिए दबाव डालने के लिए स्वतंत्र है।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “जब मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, तो हम इसमें हस्तक्षेप कैसे कर सकते हैं? यह वर्ष 2024 का मामला है और हम किसी निश्चित समय सीमा का निर्धारण नहीं कर सकते।”

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय पहले ही घरेलू हिंसा (DV Act) के तहत याचिकाकर्ता की सुनवाई के दौरान पारित अंतरिम आदेश पर रोक लगा चुका है। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं को इस स्तर पर हस्तक्षेप से अलग रखा।

हालांकि, पीठ ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ता की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत तथ्यों को सुनवाई के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी तथ्यों पर विचार करना उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है।

यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में मंच की मर्यादा और अधिकार क्षेत्र के सिद्धांत को रेखांकित करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लंबित मामलों में सुप्रीम कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं करता।

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