Hardoi Teachers News:”आलोक मिश्रा ने प्रेस वार्ता में प्राथमिक विद्यालय के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता का विरोध किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने ओपीएस बहाली, रिक्त पदों पर नियुक्ति और गैर-शैक्षिक रोजगार से मुक्ति की मांग की है।“
हरदोई। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के संयोजक व प्रांतीय संयुक्त महामंत्री अलोक मिश्रा ने जनपद मुख्यालय के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में प्राथमिक शिक्षकों की समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके समाधान के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
टीईटी अनिवार्यता का विरोध
प्रेस वार्ता में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता का भी विरोध किया गया। संघ का कहना है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना उचित नहीं है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
संघ की ओर से कई प्रमुख मांगें उठाई गईं, जिनमें—
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
- लंबित वेतन और एरियर का भुगतान
- समयबद्ध पदोन्नति
- सेवा संबंधी विसंगतियों का समाधान
- विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था
संयोजक ने कहा कि कई विद्यालयों में अभी भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
गैर-शैक्षिक कार्यों का भी उठाया मुद्दा
शिक्षक संघ ने यह भी कहा कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा सर्वेक्षण, चुनाव ड्यूटी और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार जैसे गैर-शैक्षिक कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। संघ ने मांग की कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए।
स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी
प्रेस वार्ता में बताया गया कि कई स्कूलों में भवन, पेयजल, फर्नीचर और शिक्षण सामग्री जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जबकि सरकार शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करती है।
आंदोलन की चेतावनी
अलोक मिश्रा ने कहा कि यदि शिक्षकों की मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संघ चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
प्रेस वार्ता में अनुराग पांडेय, आशीष दीक्षित, महेंद्र प्रताप सिंह और अभिषेक गुप्ता समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
संयोजक ने अंत में कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं, इसलिए उनकी उपेक्षा करना देश के भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है।
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