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कौशाम्बी महाशिवरात्रि उत्सव 2026 के अवसर पर पूरबशरीरा स्थित 110 वर्ष पुराने नर्मदेश्वर-गंगेश्वर शिव मंदिर में विधिवत पूजन, दीपदान और रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ भक्ति में लीन होकर पूरी रात जागरण किया। पढ़ें पूरी धार्मिक खबर।

हाईलाइट :

  • कौशाम्बी महाशिवरात्रि उत्सव 2026 पर ऐतिहासिक शिव मंदिर में भव्य आयोजन
  • 110 वर्ष पुराने नर्मदेश्वर-गंगेश्वर शिव मंदिर में दीपदान और रात्रि जागरण
  • संवत 1976 में जमींदार मालकिन साहेब गंगा कुंवर ने कराई थी स्थापना
  • 20 वर्ष पूर्व शुरू हुई दीपदान और जागरण की विशेष परंपरा
  • शिव पुराण और गीता में वर्णित है महाशिवरात्रि जागरण का महत्व

दिनेश कुमार गर्ग
स्थानीय संपादक

कौशाम्बी। जनपद कौशाम्बी की प्रसिद्ध नगर पंचायत पूरब-पश्चिम सरीरा के ग्राम पूरबशरीरा स्थित 110 वर्ष पुराने नर्मदेश्वर-गंगेश्वर शिव मंदिर में रविवार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विधिवत पूजन, दीपदान और रात्रि जागरण का भावपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने देर रात तक भजन-कीर्तन कर भगवान शिव का स्मरण किया और मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा।

मनोकामना पूर्ण करने वाले इस प्राचीन मंदिर की स्थापना संवत 1976 वैशाख कृष्ण पक्ष में तत्कालीन जमींदार मालकिन साहेब गंगा कुंवर द्वारा कराई गई थी। मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव की परंपरा स्थापना काल से ही चली आ रही है। हालांकि दीपदान और रात्रि जागरण की परंपरा लगभग 20 वर्ष पूर्व मालकिन साहेब गंगा कुंवर की चौथी पीढ़ी के वारिस दिनेश कुमार गर्ग द्वारा प्रारंभ की गई, जिसमें समस्त गर्ग (शुक्ल) परिवार और ग्रामवासी श्रद्धाभाव से सहभागिता करते हैं।

महाशिवरात्रि जागरण का महत्व पुराणों में विशेष रूप से वर्णित है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन से कहा गया— “या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी”, अर्थात जो रात्रि समस्त प्राणियों के लिए निद्रा की होती है, उसमें संयमी भक्त जागकर ईश्वर का स्मरण करता है। वहीं शिव पुराण की कथा के अनुसार एक आखेटक व्याध ने अनजाने में महाशिवरात्रि की रात्रि बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दिए, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उसे दर्शन देकर भुक्ति और मुक्ति दोनों का आशीर्वाद प्रदान किया।

मान्यता है कि वाराणसी में महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती के दिव्य विवाह का उत्सव मनाया जाता है। इसी आस्था और श्रद्धा के साथ पूरबशरीरा के इस ऐतिहासिक मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूरी रात जागकर शिवभक्ति में लीन रहकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन में ग्रामवासियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने धार्मिक वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया।

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