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“यूपी SIR विवाद में भाजपा विधायक नीरज बोरा के 18 हजार वोट बढ़ाने के दावे पर सपा ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। आयोग ने तथ्य रखे और जांच के आदेश दिए।”

हाइलाइट्स :

  • यूपी में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज
  • भाजपा विधायक नीरज बोरा के 18 हजार वोट बढ़ाने के बयान पर विवाद
  • समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
  • चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए तथ्य सार्वजनिक किए
  • लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी को जांच के आदेश

यूपी SIR विवाद एक बार फिर सियासी केंद्र में आ गया है। उत्तर प्रदेश में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के बीच लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नीरज बोरा के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

विधायक नीरज बोरा ने सार्वजनिक मंच से दावा किया कि जहां मतदाता सूची से वोट काटे जा रहे हैं, वहीं नए वोट भी जोड़े जा रहे हैं और उन्होंने महज एक सप्ताह में 18 हजार वोट बढ़वाने का काम किया है। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सामने आते ही राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

सपा का हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने वीडियो साझा करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। सपा का आरोप है कि भाजपा विधायक की यह स्वीकारोक्ति SIR प्रक्रिया में संभावित अनियमितता और पक्षपात की ओर इशारा करती है।

पार्टी ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। सपा नेताओं ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो वे इस मुद्दे को न्यायालय तक ले जाएंगे।

चुनाव आयोग का जवाब: “तथ्य कुछ और कहते हैं”

विवाद बढ़ने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के कार्यालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि:

  • पिछले एक सप्ताह में लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र में केवल 1407 फॉर्म-6 ही प्राप्त हुए हैं
  • 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद एक भी नया वोट नहीं जोड़ा गया
  • तथ्यों की पुष्टि किए बिना आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अन्यायपूर्ण है

चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के जिला निर्वाचन अधिकारी को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए हैं।

SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक निगाहें

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया को लेकर पहले से ही राजनीतिक दल सतर्क हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पारदर्शिता की कमी है, जबकि चुनाव आयोग हर बार नियमों और आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट कर रहा है।

UP SIR Controversy ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मतदाता सूची से जुड़ा हर बयान और हर दावा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। अब सबकी निगाहें जिला निर्वाचन अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस विवाद की सच्चाई सामने लाएगी।

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