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“सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह एक पवित्र और महान संस्था है, लेकिन दहेज की सामाजिक बुराई ने इसे दुर्भाग्य से व्यापारिक लेन-देन में बदल दिया है। कोर्ट ने इसे पूरे समाज के खिलाफ अपराध बताया और दहेज प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की।”

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रथा पर एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए बेहद सख़्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं बल्कि एक पवित्र और महान सामाजिक संस्था है, जो आपसी विश्वास, सम्मान और समानता पर आधारित होती है। लेकिन दहेज की कुप्रथा ने इस पवित्र संस्था को “व्यापारिक लेन-देन” का रूप दे दिया है।

दहेज हत्या समाज के खिलाफ अपराध — SC

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि:

  • दहेज हत्या किसी एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं है,
  • बल्कि पूरे समाज के खिलाफ गंभीर अपराध है।

कोर्ट ने कहा कि दहेज की वजह से होने वाली मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज की नैतिकता पर सीधा वार है।

‘दहेज विवाह की पवित्रता को नष्ट करता है’

Bench ने कहा कि दहेज की सामाजिक बुराई:

  • विवाह की गरिमा घटाती है,
  • रिश्तों में जहर घोलती है,
  • और युवतियों के जीवन को असुरक्षित बनाती है।

कोर्ट ने कहा कि विवाह की पवित्रता को बचाने के लिए समाज, परिवार और कानून—तीनों को मिलकर कठोर कदम उठाने होंगे।

कानून सख्त, लेकिन जागरूकता सबसे बड़ी जरूरत

SC ने कहा कि:

  • दहेज प्रतिषेध अधिनियम,
  • IPC 304B (दहेज हत्या),
  • 498A (क्रूरता)

जैसे कानून मौजूद हैं, लेकिन इनके प्रभावी लागू होने के लिए समाजिक बदलाव जरूरी है।

समाज को चेतावनी: दहेज मांगना क्राइम है, परंपरा नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दहेज परंपरा नहीं, स्पष्ट अपराध है और इसे सामाजिक स्वीकार्यता नहीं मिलनी चाहिए।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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