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“उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने 1.93 करोड़ वोटरों को तार्किक गड़बड़ी की श्रेणी में चिन्हित किया है। 2002 की वोटर लिस्ट से रिकॉर्ड न मिलने पर जांच जारी है। अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।”

हाइलाइट्स:

  • चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने यूपी में 1.93 करोड़ वोटरों को संदिग्ध श्रेणी में रखा
  • इन वोटरों का रिकॉर्ड 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा
  • पहले चरण में ही 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कट चुके हैं
  • अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप लगाया
  • कांग्रेस की निगरानी टीम में मृत व पार्टी छोड़ चुके नेताओं के नाम होने की चर्चा

अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी संपादक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताज़ा जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने लगभग 1.93 करोड़ वोटरों को लॉजिकल एरर यानी तार्किक गड़बड़ी की श्रेणी में चिन्हित किया है।

इन वोटरों का रिकॉर्ड या तो 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा, या फिर उनके दस्तावेज़ों में विसंगतियां पाई गई हैं। चुनाव आयोग ने इन सभी मामलों की गहन जांच शुरू कर दी है, और संभावना जताई जा रही है कि जांच के बाद इन नामों पर कार्रवाई हो सकती है।

पहले ही चरण में 2.89 करोड़ वोटर हो चुके हैं बाहर

एसआईआर के प्रथम चरण के बाद जारी प्रारंभिक मतदाता सूची में करीब 2.89 करोड़ वोटरों के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। अब इसके बाद 1.93 करोड़ नए वोटर भी संदेह के दायरे में आ गए हैं, जिससे कुल मिलाकर मतदाता सूची में बड़ा बदलाव संभव है।

भाजपा पर अखिलेश यादव का बड़ा आरोप

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि

“भाजपा, चुनाव आयोग की मिलीभगत से फर्जी वोटरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि मतदाता सूची को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।”

अखिलेश यादव ने अपने पीडीए प्रहरियों को निर्देश दिया है कि वे हर स्तर पर निगरानी रखें और किसी भी हाल में फर्जी वोटर सूची में शामिल न होने दें।

भाजपा का बूथ स्तर पर लक्ष्य

उधर, भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे हर बूथ पर कम से कम 200 नए वोटर जोड़ने का प्रयास करें। पार्टी का कहना है कि उसके कई समर्थकों के नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं।

कांग्रेस की निगरानी टीम पर भी सवाल

मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए कांग्रेस पार्टी ने भी नेताओं की एक टीम गठित की है। हालांकि, खबर सामने आई है कि इस सूची में कुछ ऐसे नेताओं के नाम शामिल हैं जो या तो अब जीवित नहीं हैं या पार्टी छोड़ चुके हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे मानवीय चूक बताते हुए सुधार किए जाने की बात कही है।

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