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लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के लिए यह गर्व का क्षण है। कला और रंगमंच के क्षेत्र में दशकों से योगदान दे रहे वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। भारत सरकार की ओर से उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।

डॉ. अनिल रस्तोगी लखनऊ के उन विरले कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने रेडियो, रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा—चारों माध्यमों में समान दक्षता के साथ अपनी पहचान बनाई। उनका सफर इस मायने में भी प्रेरक है कि उन्होंने 70 वर्ष की उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और आज 82 वर्ष की आयु में भी लगातार सक्रिय हैं।

लखनऊ से मुंबई तक संघर्ष की प्रेरक कहानी

डॉ. रस्तोगी का जन्म और कर्मभूमि लखनऊ रही है। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ से सेवानिवृत्ति के बाद जब अधिकांश लोग विश्राम की राह चुनते हैं, तब डॉ. रस्तोगी ने मुंबई जाकर अभिनय में खुद को स्थापित करने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने कभी रोल को छोटा-बड़ा नहीं माना, बल्कि मजबूत किरदार और स्थिर दृश्य को प्राथमिकता दी।

आज उनके नाम 70 से अधिक फिल्में, 15 वेब सीरीज, 22 धारावाहिकों के 500 से ज्यादा एपिसोड और 100 नाटकों के 950 से अधिक मंचन दर्ज हैं।

दोस्त की एक सलाह ने बदली दिशा

डॉ. रस्तोगी के जीवन में निर्णायक मोड़ 1962 में आया, जब एक मित्र ने उनसे कहा— “तुम्हारी आवाज अच्छी है, रेडियो में क्यों नहीं काम करते?” इस सलाह ने उन्हें 1971 में आकाशवाणी तक पहुंचाया, जहां वे बी-ग्रेड कलाकार के रूप में चयनित हुए। रेडियो से शुरू हुआ यह सफर थिएटर, फिर टेलीविजन और अंततः सिनेमा तक पहुंचा।

थिएटर से मिली पहचान, इश्कजादे से मिली लोकप्रियता

1989 में धारावाहिक ‘उड़ान’ से टीवी पर पहचान बनी। इसके बाद ये वो मंजिल तो नहीं, मरीचिका, मैं मेरी पत्नी और वो और खून बहा गंगा में जैसी फिल्मों में अभिनय किया। हालांकि, 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘इश्कजादे’ से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान मिली।

सम्मान और पुरस्कारों से सजी उपलब्धियों की सूची

डॉ. अनिल रस्तोगी को इससे पहले भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2023)
  • उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी भारत रत्न अटल उर्दू सम्मान (2024)
  • दूरदर्शन उत्तर प्रदेश लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2024)
  • उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1984)
  • दो राष्ट्रीय और छह राज्य स्तरीय पुरस्कार
  • देशभर की संस्थाओं से 65 से अधिक सम्मान

लखनऊ के लिए गौरव का क्षण

डॉ. अनिल रस्तोगी की पद्मश्री से ताजपोशी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी गर्व का विषय है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि उम्र कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकती

उनकी यह उपलब्धि युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है कि समर्पण, धैर्य और निरंतर अभ्यास से हर मंच जीता जा सकता है।

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