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“दिनेश प्रताप सिंह ने BSP विधायक और समधी उमाशंकर सिंह के घर आयकर छापे पर नाराज़गी जताई। बलिया जिले में हुई IT रेड को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज।” पढ़ें पूरी खबर..

हाइलाइट्स:

  • उत्तर प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का बयान चर्चा में
  • BSP विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई
  • बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र से विधायक हैं उमाशंकर सिंह
  • मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा – ‘बीमारी के दौर में रेड संवेदनहीन’
  • सियासी हलकों में ब्राह्मण राजनीति से जोड़कर देखी जा रही कार्रवाई

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई जब प्रदेश सरकार के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने समधी और बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर पड़े आयकर छापों को लेकर खुलकर नाराज़गी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे अमानवीय और संवेदनहीन कदम बताया।

बताया जा रहा है कि रसड़ा (बलिया) से विधायक उमाशंकर सिंह के विभिन्न ठिकानों पर बुधवार को आयकर विभाग की टीमों ने छापेमारी की। उमाशंकर सिंह बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। प्रदेश की राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

मंत्री ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध

उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उमाशंकर सिंह उनके समधी हैं और पिछले दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं और इस समय उनका पूरा ध्यान इलाज पर है। मंत्री के अनुसार उनके अधिकांश व्यवसाय बंद हो चुके हैं और वे अपने आवास पर आइसोलेशन में रह रहे हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि विधानसभा सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में भी वे एक घंटे के लिए सदन नहीं पहुंच सके। वर्तमान परिस्थितियों में उनके आवास पर नर्स या डॉक्टर के आने-जाने पर भी रोक लगी है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि यदि उनकी सेहत को कोई नुकसान पहुंचता है तो संबंधित संस्थाएं जिम्मेदार होंगी।

राजनीतिक बदले की आशंका

मंत्री ने अपने बयान में संकेत दिया कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष की भावना से प्रेरित हो सकती है। उन्होंने कहा कि दुर्लभतम अपराधों में भी न्यायालय मानवीय आधार पर राहत देता है, लेकिन ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में की गई कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।

राजनीतिक गलियारों में इस छापेमारी को आगामी चुनावी रणनीति और ब्राह्मण राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में बसपा द्वारा ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिशों ने सियासी समीकरण बदले हैं। ऐसे में इस कार्रवाई के समय को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

सियासत गरमाई

प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के मंत्री द्वारा केंद्र की एजेंसी पर सवाल उठाए जाने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्ष ने जहां इसे सत्ता के अंदरूनी मतभेद का संकेत बताया है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल आयकर विभाग की कार्रवाई जारी है और आधिकारिक रूप से छापे के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

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