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86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) लखनऊ में संपन्न। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रीय विधायी सूचकांक, 30 बैठकों और संवाद आधारित लोकतंत्र पर जोर दिया।

हाइलाइट्स :

  • लखनऊ में 86वें AIPOC का सफल समापन
  • लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का राष्ट्रीय विधायी सूचकांक का ऐलान
  • साल में न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करने पर जोर
  • Disruption नहीं, Discussion और Dialogue की अपील
  • 24 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 36 पीठासीन अधिकारी शामिल

लखनऊ।86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में तीन दिवसीय आयोजन के बाद बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 19 से 21 जनवरी 2026 तक चले इस सम्मेलन के समापन सत्र को लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने संबोधित किया।

समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, राज्य सभा के उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

राष्ट्रीय विधायी सूचकांक बनाने की घोषणा

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने समापन भाषण में कहा कि देश की विधायिकाओं को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा। इससे देशभर की विधानसभाओं और विधान परिषदों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, कार्यकुशलता और संवाद की गुणवत्ता में सुधार होगा।
उन्होंने इस उद्देश्य के लिए एक समिति के गठन की भी जानकारी दी।

साल में कम से कम 30 बैठकें जरूरी

श्री बिरला ने कहा कि राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त मंच बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

बजट सत्र से पहले सभी दलों से सहयोग की अपील

लोक सभा अध्यक्ष ने सम्मेलन के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। आगामी बजट सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि नियोजित गतिरोध और व्यवधान लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। सदन में जब व्यवधान होता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस आम नागरिक का होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें Disruption नहीं, बल्कि Discussion और Dialogue की संस्कृति को मजबूत करना होगा।

लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि

ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है और जनता के प्रति जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण होनी चाहिए।

संविधान के प्रहरी हैं पीठासीन अधिकारी

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल सदन की कार्यवाही संचालित करने वाले नहीं होते, बल्कि वे संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक होते हैं। उनकी निष्पक्षता और संवेदनशीलता से ही सदन की दिशा तय होती है।

सम्मेलन में पारित हुए छह महत्वपूर्ण संकल्प

86वें AIPOC में कुल छह अहम संकल्प पारित किए गए, जिनमें वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान, सालाना 30 बैठकें, प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग, जनप्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि और राष्ट्रीय विधायी सूचकांक का निर्माण शामिल है।

रिकॉर्ड सहभागिता वाला सम्मेलन

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। सहभागिता की दृष्टि से यह अब तक का सबसे बड़ा अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन रहा।

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश विधान सभा, विधान परिषद, लोक सभा व राज्य सभा सचिवालय और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि AIPOC जैसे मंच भारतीय संसदीय लोकतंत्र को अधिक सुदृढ़, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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