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मोहन भागवत घर वापसी बयान: “लखनऊ में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू दंपतियों को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने का सुझाव दिया। सामाजिक समरसता, जनसंख्या संतुलन और घर वापसी पर जोर देते हुए उन्होंने कई अहम बातें कहीं।”

हाइलाइट्स:

  • मोहन भागवत ने हिंदू दंपतियों को तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दी।
  • घर वापसी अभियान तेज करने की अपील।
  • सामाजिक समरसता और समन्वय पर जोर।
  • घुसपैठियों पर “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” की बात कही।
  • मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले हों।

लखनऊ। मोहन भागवत घर वापसी बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश सामने आया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सामाजिक सद्भाव बैठक में हिंदू समाज के संगठन, जनसंख्या संतुलन और घर वापसी अभियान पर विस्तार से अपनी बात रखी।

तीन बच्चे पैदा करने की सलाह

मोहन भागवत ने कहा कि प्रत्येक हिंदू दंपति को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उनका तर्क था कि जो समाज तीन से कम बच्चे पैदा करता है, वह भविष्य में समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संदेश नवविवाहित दंपतियों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

घर वापसी पर जोर

सरसंघचालक ने मतांतरण पर चिंता जताते हुए कहा कि घर वापसी का कार्य तेज किया जाना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में वापस लौटते हैं, उनका ध्यान रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता है।

घुसपैठ पर कड़ा रुख

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी को एक मातृभूमि का पुत्र मानने का भाव होना चाहिए।

सामाजिक समरसता और परिवार की भूमिका

मोहन भागवत ने कहा कि समाज की इकाई व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार है। सामाजिक समरसता भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार से आएगी। मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और जाति आधारित भेदभाव समाप्त होना चाहिए।

मातृशक्ति और शिक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि मातृशक्ति परिवार का आधार है और महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण मिलना चाहिए। बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जिसमें करियर का अर्थ केवल कमाई नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान हो।

तकनीक और अनुशासन

तकनीक के उपयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एआई, मोबाइल और टीवी का उपयोग अनुशासन में रहकर होना चाहिए। नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।

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