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“सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी बनाम ईडी मामले की सुनवाई जारी है। कलकत्ता हाईकोर्ट में कथित हंगामे, आई-पैक कार्यालय छापेमारी और नोटिस विवाद पर शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी की। पूरी खबर पढ़ें।”

हाइलाइट्स :

  • सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी बनाम ईडी केस की सुनवाई जारी
  • कलकत्ता हाईकोर्ट में कथित हंगामे को लेकर ईडी ने उठाए सवाल
  • जस्टिस मिश्रा बोले— नोटिस जारी करने से रोका नहीं जा सकता
  • कपिल सिब्बल ने आरोपों को बताया निराधार
  • हाईकोर्ट को “जंतर-मंतर” बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले पर गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट में कथित हंगामे और ईडी की जांच में बाधा के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। ईडी ने आरोप लगाया है कि आई-पैक (I-PAC) कार्यालय और उसके निदेशक के घर पर हुई छापेमारी के दौरान राज्य सरकार के हस्तक्षेप के कारण जांच प्रभावित हुई।

हाईकोर्ट में हंगामे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 9 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे वकीलों को बुलाया गया, जिनका केस से कोई लेना-देना नहीं था। इससे न्यायिक कार्य बाधित हुआ और अदालत को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

इस पर पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा—
“क्या उच्च न्यायालय को जंतर-मंतर बना दिया गया था?”

ईडी की दलीलें

ईडी ने कहा कि यह घटनाक्रम एक खतरनाक उदाहरण पेश करता है, जिससे केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिरता है। यदि इस तरह के हस्तक्षेप को नजरअंदाज किया गया, तो यह भविष्य में कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

कपिल सिब्बल का जवाब

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी भी दस्तावेज या उपकरण की जब्ती नहीं हुई और यह बात ईडी के अपने पंचनामा से प्रमाणित होती है।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा—
“अगर जांच एजेंसी का इरादा जब्ती का होता, तो वह कर सकती थी। लेकिन हमें इस पूरे घटनाक्रम की जांच करनी होगी। आप नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

ईडी ने पहले इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन वहां सुनवाई के दौरान कथित अराजकता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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