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UP Budget Session 2026 के आखिरी दिन विधान परिषद में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री थे और रहेंगे। इस पर सपा MLC ने पलटवार करते हुए 15 मार्च 2027 को अखिलेश के सीएम बनने का दावा किया। अफसरों द्वारा फोन न उठाने, सुरक्षा और आउटसोर्सिंग मुद्दे पर भी हंगामा।

हाइलाइट्स:

  • विधान परिषद में केशव मौर्य का बयान- “अखिलेश पूर्व मुख्यमंत्री हैं और रहेंगे।”
  • सपा MLC राजेंद्र चौधरी बोले- 15 मार्च 2027 को अखिलेश सीएम होंगे।
  • डीएम द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा शून्यकाल में उठा।
  • मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की देरी पर सभापति नाराज।

लखनऊ। यूपी विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज रही।

अखिलेश की सुरक्षा पर बयानबाजी

विधान परिषद में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सुरक्षा का मुद्दा उठा। इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “अखिलेश यादव हमारे पूर्व मुख्यमंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ही रहेंगे।”

उन्होंने बताया कि अखिलेश की स्वीकृत सुरक्षा 183 कर्मियों की है, जबकि वर्तमान में 185 सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, जिनमें 24 कोबरा कमांडो शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनएसजी सुरक्षा केंद्र सरकार का विषय है।

इस पर सपा के राजेंद्र चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा, “15 मार्च 2027 को अखिलेश यादव इसी सदन में बतौर मुख्यमंत्री होंगे।” जवाब में मौर्य ने इसे “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” करार दिया।

अधिकारियों पर फोन न उठाने का आरोप

विधान परिषद में शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जिलाधिकारियों द्वारा सीयूजी नंबर न उठाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम फोन नहीं उठाते और अर्दली फोन रिसीव कर बहस करते हैं।

एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने कई बार फोन किया, लेकिन हर बार “मैडम बिजी हैं” कहकर बात टाल दी गई। जासमीर अंसारी ने कहा कि उनके जिले में सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री तक को अधिकारियों के खिलाफ धरना देना पड़ा।

सुरेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के एमडी से बात करने की कोशिश की तो पीआरओ ने खुद को एमडी बताकर बात की।

इस पर केशव मौर्य ने आश्वासन दिया कि जिन जिलों की शिकायत आई है, वहां के अधिकारियों से बात की जाएगी। सभापति ने भी कहा कि यह समस्या कई जिलों में है।

मंत्री की अनुपस्थिति पर नाराजगी

भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के सवाल के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सदन में मौजूद नहीं थे। सभापति ने दो बार नाम पुकारा। बाद में मंत्री के पहुंचने पर उन्होंने देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि यह कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं है।

आउटसोर्सिंग और रोजगार का मुद्दा

विधानसभा में सपा विधायक रागिनी सोनकर ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार की नीति है कि किसी कर्मचारी को नहीं निकाला जाएगा। कंपनियां बदल सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

बेरोजगारी भत्ते के सवाल पर राजभर ने कहा कि पूर्व सरकारों ने केवल सीमित अवधि के लिए भत्ता दिया, जबकि वर्तमान सरकार रोजगार सृजन पर विश्वास करती है। उन्होंने दावा किया कि 2017 से अब तक 8 लाख 45 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

महंगाई और कविता पर टोकाटाकी

सपा विधायक आशु मलिक महंगाई पर सवाल पूछते समय कविता पढ़ने लगे, जिस पर स्पीकर सतीश महाना ने टोकते हुए कहा— “प्रश्न पूछिए, कुछ भी मत बोलिए।”

मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने स्पष्ट किया कि यूरिया और पेट्रोल-डीजल के दाम केंद्र सरकार तय करती है।

इजरायल में श्रमिकों का मुद्दा

कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने इजरायल भेजे गए यूपी के युवाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाया। जवाब में मंत्री ने कहा कि लगभग 6 हजार युवाओं को भेजा गया है और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही यह निर्णय लिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक साल में श्रमिकों ने करीब 1000 करोड़ रुपये प्रदेश में भेजे हैं।

बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में तीखे राजनीतिक हमलों, आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों ने माहौल गरमाए रखा। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के समापन संबोधन और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर है।

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