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पासपोर्ट नहीं दिखाऊंगी—बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। ममता सरकार की मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग पर मतदाताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाया और सुनवाई के दौरान पासपोर्ट दिखाने से इनकार कर दिया।

हाइलाइट्स :

  • बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी बवाल
  • मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग पर उत्पीड़न का आरोप लगाया
  • सुनवाई में पासपोर्ट दिखाने से किया इनकार
  • टीएमसी ने SIR को भाजपा की साजिश बताया
  • विधानसभा चुनाव से पहले विवाद ने पकड़ा जोर

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे मतदाताओं का उत्पीड़न करार दिया है।

रविवार को कोलकाता के केशव एकेडमी स्थित सुनवाई केंद्र से बाहर निकलते ही मंत्री शशि पांजा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने दो टूक कहा कि वह अपना पासपोर्ट नहीं दिखाएंगी और यह उनका लोकतांत्रिक विरोध है। पांजा ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की मांगें उनकी नागरिकता पर संदेह पैदा करने का प्रयास हैं।

2002 से वोटर, फिर भी नोटिस

शशि पांजा ने हैरानी जताई कि उनका नाम वर्ष 2002 से मतदाता सूची में दर्ज है और वह तीन बार निर्वाचित विधायक रह चुकी हैं, इसके बावजूद उन्हें सुनवाई के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में चार सदस्य हैं, लेकिन नोटिस सिर्फ उन्हें ही दिया गया।

नोटिस में यह तर्क दिया गया था कि उनके द्वारा दी गई जानकारी अधूरी है, जिससे उनकी वैधता पर संदेह होता है। इस पर मंत्री ने सवाल उठाया कि वर्षों से मतदान करने वाले जनप्रतिनिधि की नागरिकता पर शक करना आयोग की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

11 वैकल्पिक दस्तावेजों की मांग का आरोप

मंत्री के अनुसार, सुनवाई केंद्र के भीतर उन्होंने आधार कार्ड और अन्य सत्यापित दस्तावेज जमा किए, इसके बावजूद अधिकारियों ने उनसे 11 वैकल्पिक दस्तावेज मांगे। पांजा ने इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया ‘हैरसमेंट’ बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कुछ खास निर्देशों के तहत काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ दल के नेताओं और आम मतदाताओं को परेशान करना है।

टीएमसी का हमला, भाजपा पर साजिश का आरोप

तृणमूल कांग्रेस पहले से ही SIR प्रक्रिया को लेकर हमलावर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस प्रक्रिया को भाजपा की साजिश बता चुकी हैं। शशि पांजा ने कहा कि जब एक कैबिनेट मंत्री को इस तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी उच्च शिक्षा से जुड़े प्रमाण पत्र देने को तैयार हैं, लेकिन पासपोर्ट न दिखाना उनका लोकतांत्रिक विरोध है। अब निगाहें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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