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लखनऊ में संदिग्ध किरायेदारों की जांच की मांग तेज हो गई है। विकास नगर थाना क्षेत्र की शेखूपुरा कॉलोनी में हालिया घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने किरायेदारों के पहचान सत्यापन की अपील की है।”

लखनऊ में संदिग्ध किरायेदारों की जांच को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी लखनऊ में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए चल रहे रात्रिकालीन टॉर्च अभियान के बीच कुछ स्थानीय इलाकों में किरायेदारों के सत्यापन की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

यह मामला विकास नगर थाना क्षेत्र स्थित शेखूपुरा कॉलोनी से जुड़ा है, जहां बीते चार-पांच महीनों के दौरान कुछ परिवार अलग-अलग मकानों में किराए पर रहने आए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन लोगों की गतिविधियों को लेकर स्पष्ट जानकारी और आधिकारिक सत्यापन नहीं हुआ है, जिससे कॉलोनी में चिंता का माहौल है।

मामला तब और चर्चा में आया जब 22 दिसंबर की रात कॉलोनी के एक मकान में पारिवारिक विवाद के दौरान मारपीट और गाली-गलौज की घटना सामने आई। सूचना पर 112 और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि विवाद को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे असंतोष बढ़ा।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह आशंका मात्र हो सकती है, लेकिन कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए किरायेदारों का पहचान सत्यापन आवश्यक है। कॉलोनीवासियों के अनुसार, एक ही समय में एक-सी पृष्ठभूमि वाले कई परिवारों का आकर बसना स्वाभाविक सवाल खड़े करता है, जिनका समाधान प्रशासनिक जांच से ही संभव है।

निवासियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह किसी समुदाय के विरुद्ध आरोप नहीं, बल्कि सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से सत्यापन की मांग है। उनका कहना है कि यदि पहचान की औपचारिक जांच हो जाए तो अनावश्यक अफवाहें भी समाप्त होंगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सकेगा।

अब यह देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में किरायेदार सत्यापन और कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाते हैं

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