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“राष्ट्र प्रेरणा स्थल लखनऊ का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया। 65 फीट ऊंची प्रतिमाएं, 230 करोड़ की लागत और बड़ा राजनीतिक संदेश।”

हाइलाइट्स:

  • पीएम मोदी ने लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊंची प्रतिमाएं
  • कुल लागत 230 करोड़ रुपये, क्षेत्रफल 65 एकड़
  • मोदी बोले—पहले एक परिवार की मूर्तियां लगती थीं
  • जनेश्वर मिश्र पार्क के बाद लखनऊ को मिली नई वैचारिक पहचान

लखनऊ। राष्ट्र प्रेरणा स्थल लखनऊ गुरुवार को देश की राजनीति और विचारधारा का नया केंद्र बनकर उभरा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां भव्य परिसर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊंची विशाल प्रतिमाओं का अनावरण कर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर तीनों राष्ट्रपुरुषों को नमन किया और इसके बाद देश की राजनीति में दशकों से चले आ रहे परिवारवाद बनाम राष्ट्रवाद की बहस को नए सिरे से धार दी।

पीएम मोदी का बड़ा संदेश: परिवारवाद पर सीधा प्रहार

पीएम मोदी ने कहा,
“पहले देश में एक ही परिवार का गौरवगान होता था। उन्हीं की मूर्तियां लगती थीं। आज भारत उस सोच से बाहर निकल चुका है। अब हर उस विभूति को सम्मान मिल रहा है, जिसने देश के लिए काम किया।”

उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति का संस्कार सम्मान, समावेश और योगदान की स्वीकृति सिखाता है। यही कारण है कि आज सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महाराज सुहेलदेव और निषादराज जैसे महापुरुषों को वह मान मिला, जिसके वे हकदार थे।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल: संरचना नहीं, विचारधारा का प्रतीक

लखनऊ में बना राष्ट्र प्रेरणा स्थल सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि भाजपा और संघ परिवार की वैचारिक यात्रा का प्रतीक माना जा रहा है।
कमल के आकार में विकसित यह परिसर भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्रवाद और अंत्योदय की अवधारणा को एक सूत्र में पिरोता है।

 प्रमुख तथ्य

  • कुल क्षेत्रफल: 65 एकड़
  • लागत: ₹230 करोड़
  • निर्माण अवधि: 2022 से 2025
  • प्रतिमाओं की ऊंचाई: 65-65 फीट
  • वजन: 42-42 टन प्रति प्रतिमा
  • धातु: कांस्य (Bronze)
  • मूर्तिकार: रामसुतार एवं मंटूराम

बीच में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा, जबकि दोनों ओर अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।

म्यूजियम, थिएटर और आधुनिक सुविधाएं

राष्ट्र प्रेरणा स्थल को केवल प्रतिमाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां आने वाली पीढ़ियों के लिए वैचारिक और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को सहेजने की पूरी व्यवस्था की गई है।

  • 6300 वर्ग मीटर में अत्याधुनिक म्यूजियम
  • 3000 सीटों की क्षमता वाला थिएटर
  • योग केंद्र, कैफेटेरिया, हेलिपैड
  • ओपन कोर्टयार्ड और गैलरी
  • भारत माता की भव्य प्रतिमा
  • एक समय में 2 लाख लोगों की क्षमता

जनसैलाब और सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम

कार्यक्रम में 25 जिलों से करीब 2 लाख लोगों के पहुंचने की व्यवस्था की गई थी।
इसके लिए 3500 से अधिक बसें लगाई गईं।

सुरक्षा के लिहाज से:

  • 18 IPS अधिकारी
  • 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी
  • NSG, ATS, बम स्क्वॉड की तैनाती
  • ड्रोन और CCTV से निगरानी

पूरे क्षेत्र को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित किया गया था।

सीएम योगी: अंत्योदय से विकसित भारत तक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,
“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश, एक विधान, एक निशान का उद्घोष किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अंत्योदय का विचार दिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को विजन दिया। आज पीएम मोदी उनके सपनों को साकार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब सुशासन, सुरक्षा और समृद्धि का मॉडल बन चुका है।

जनेश्वर मिश्र पार्क से राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,
जिस तरह जनेश्वर मिश्र पार्क ने लखनऊ को हरियाली और सार्वजनिक जीवन की नई पहचान दी थी, उसी तरह राष्ट्र प्रेरणा स्थल लखनऊ राजधानी को वैचारिक, राजनीतिक और पर्यटन के नक्शे पर नई ऊंचाई दे रहा है।

यह स्थल आने वाले वर्षों में

  • राजनीतिक अध्ययन
  • वैचारिक पर्यटन
  • राष्ट्रीय आयोजनों
    का बड़ा केंद्र बनेगा।

यूपी, विकास और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि:

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है
  • यूपी में डिफेंस कॉरिडोर तेजी से आगे बढ़ रहा है
  • ब्रह्मोस मिसाइल अब लखनऊ में बन रही है
  • एक्सप्रेसवे, मेट्रो और डिजिटल कनेक्टिविटी यूपी की नई पहचान बन रही है

उन्होंने कहा कि “आज यूपी विकास के लिए जाना जाता है, न कि पिछड़ेपन के लिए।”

राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि
✔ भाजपा की वैचारिक राजनीति
✔ परिवारवाद बनाम राष्ट्रवाद की बहस
✔ यूपी को राष्ट्रीय केंद्र बनाने की रणनीति
का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

लखनऊ ने एक बार फिर साबित किया कि वह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श की धुरी बन चुका है।

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