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“सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों का दिमाग नहीं पढ़ा जा सकता कि वे कब काट लें। स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे परिसरों से कुत्ते हटाने के निर्देश, राज्यों को चेतावनी।”

हाइलाइट्स :

  • सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई जारी
  • कोर्ट बोला- कुत्तों के मन को नहीं पढ़ सकते
  • रेबीज और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बताया
  • संस्थागत परिसरों से कुत्ते हटाने का निर्देश
  • नियम न मानने वाले राज्यों पर सख्त कार्रवाई के संकेत

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते सुनवाई के दौरान बुधवार को शीर्ष अदालत ने एक अहम और सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि किसी कुत्ते के मन में क्या चल रहा है और वह कब किसी व्यक्ति को काट ले।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

रेबीज और सड़क हादसों का खतरा

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों से केवल रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का ही खतरा नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है। यह समस्या खासतौर पर स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा गंभीर है।

संस्थागत परिसरों से हटाने के निर्देश

गौरतलब है कि इससे पहले 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए
कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद आश्रय स्थलों में भेजा जाए।

कपिल सिब्बल की दलील

डॉग लवर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि सभी कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना शारीरिक और आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सभी कुत्तों को पकड़ना समाधान नहीं है और इस समस्या का समाधान वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए।

कोर्ट का जवाब: रोकथाम बेहतर

इस पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा नियमों और कानूनों का पालन हो, जो फिलहाल नहीं हो रहा है।

राज्यों को सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जिन राज्यों ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है या नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते सुनवाई से साफ है कि अदालत इस मुद्दे पर अब नरमी के मूड में नहीं है। जन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने कानून के सख्त पालन का संदेश दिया है।

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