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सीएम योगी सदन में बजट सत्र के अंतिम दिन विपक्ष पर तीखा हमला बोला। जाति की राजनीति, GDP, राजकोषीय घाटा, MSME, निजी स्कूल फीस और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष में तीखी बहस हुई।

हाइलाइट्स:

  • सीएम योगी ने दिनकर की कविता पढ़ते हुए विपक्ष पर साधा निशाना
  • नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के बयान पर सदन में ठहाके
  • यूपी की GDP 36 लाख करोड़ पहुंचने का दावा
  • राजकोषीय घाटा 4% से घटकर 2% के आसपास
  • निजी स्कूल फीस नियंत्रण के लिए कानून बनाने की मांग
  • आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को न हटाने का आश्वासन

लखनऊ, 20 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में तीखी बहस, तंज और ठहाकों के बीच राजनीतिक तापमान चरम पर रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट पर जवाब देते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा और रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्ति “जाति-जाति का शोर मचाते कायर” दोहराते हुए कहा कि समाज को बांटने की राजनीति अब स्वीकार्य नहीं है।

फीस नियंत्रण कानून की मांग पर सदन में ठहाके

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की बढ़ती फीस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को फीस निर्धारण के लिए सख्त कानून लाना चाहिए। उन्होंने City Montessori School, Jaipuria Group और Galgotias University का जिक्र करते हुए फीस वृद्धि पर सवाल खड़े किए।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए उनके एक व्यंग्यात्मक संदर्भ पर मुख्यमंत्री समेत पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।

‘आप आखिरी पीढ़ी के सच्चे समाजवादी’—योगी की चुटकी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “आप आखिरी पीढ़ी के सच्चे समाजवादी हैं।” उन्होंने शिवपाल यादव का नाम लेते हुए कहा कि “आपके साथ शिवपाल जी जैसे लठैत भी चलने की कोशिश करते रहे।”

योगी ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता आंकड़ों में गड़बड़ी कर रहे हैं और यह “चाचा का असर” है।

आर्थिक उपलब्धियों का ब्योरा: जीडीपी 40 लाख करोड़ का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश की जीडीपी 13 लाख करोड़ से बढ़कर 36 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है और जल्द ही इसे 40 लाख करोड़ तक ले जाया जाएगा।

  • 2016-17 में राजकोषीय घाटा 4% से अधिक था, जो अब 2% के आसपास है।
  • पूंजीगत व्यय 2026 में 1.77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • प्रति व्यक्ति आय 43,000 रुपये से बढ़कर 1,20,000 रुपये पार करने का दावा।

उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य माना गया है और प्रदेश अब निवेश की प्रमुख मंजिल बन चुका है।

एमएसएमई और रोजगार पर सरकार का पक्ष

सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासन में एमएसएमई की स्थिति खराब थी, जबकि वर्तमान सरकार ने सर्वे कराकर उद्योगों को बढ़ावा दिया।

2019 में शुरू की गई विश्वकर्मा सम्मान योजना के तहत 1.10 लाख युवाओं को ब्याजमुक्त ऋण दिया गया। बैंकिंग क्षेत्र में भी प्रदेश की भागीदारी 43% से बढ़कर 61-62% तक पहुंचने का दावा किया गया।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर सरकार का आश्वासन

सत्र की शुरुआत में सपा विधायक रागिनी सोनकर ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन और सेवा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि कंपनियां बदल सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों को नहीं बदला जाएगा। 2009 और 2016 के आदेश प्रभावी हैं और सरकार ने कोई नया प्रतिकूल निर्णय नहीं लिया है।

महंगाई और ‘बोतल’ पर तकरार

सपा विधायक आर.के. वर्मा ने कविता के माध्यम से महंगाई पर तंज कसा। मंत्री के ‘बोतल’ संबंधी बयान पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिससे कुछ देर के लिए कार्यवाही बाधित रही।

कर्ज और राजकोषीय घाटे पर आंकड़ों की जंग

माता प्रसाद पांडेय ने प्रदेश पर 19.42 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का आरोप लगाया, जिसका संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने तत्काल खंडन किया और कर्ज 9 लाख करोड़ से कम होने का दावा किया।

दोनों पक्षों के बीच राजकोषीय घाटे और प्रति व्यक्ति आय को लेकर तीखी बहस हुई।

AI समिट और कांग्रेस पर टिप्पणी

मुख्यमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट का जिक्र करते हुए कहा कि 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने भारत मंडपम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की आलोचना की और इसे शर्मनाक बताया।

शिवपाल का पलटवार—‘यह आखिरी बजट’

शिवपाल यादव ने कहा कि यह सरकार का आखिरी बजट है। उन्होंने आरोप लगाया कि “हम लैपटॉप बांटते थे और ये लाठियां बांटते हैं।” उन्होंने बजट स्वीकृतियों में देरी और विकास योजनाओं के अधूरे रहने का मुद्दा उठाया।

विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, तंज और ठहाकों के बीच सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं, जबकि विपक्ष ने आर्थिक आंकड़ों, बढ़ते कर्ज, महंगाई और शिक्षा शुल्क जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।

सत्र भले समाप्त हो गया हो, लेकिन राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले चुनावी माहौल में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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