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SC School Sanitary Pad Order: “सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में छात्राओं के लिए मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड और अलग शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

हाइलाइट्स :

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड अनिवार्य किए
  • लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय जरूरी
  • दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ टॉयलेट का निर्देश
  • नियमों का पालन नहीं करने पर स्कूलों की मान्यता रद्द होगी
  • केंद्र और राज्य सरकारों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर स्कूल में छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। शीर्ष अदालत ने इसे मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा मौलिक अधिकार बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं देना भी अनिवार्य जिम्मेदारी है। इसमें लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय और दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ टॉयलेट शामिल हैं।

‘नियम नहीं माने तो मान्यता रद्द’

अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि निजी स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं—

  • मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराते
  • लड़के-लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं बनाते

तो उनकी स्कूल मान्यता रद्द की जा सकती है।

सरकारें भी होंगी जवाबदेह

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर राज्य सरकारें या केंद्र शासित प्रदेश इन सुविधाओं को लागू करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

यह आदेश खास तौर पर सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

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