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यूपी में 5वीं तक मोबाइल बैन को लेकर महिला आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। गाजियाबाद की आत्महत्या घटना के बाद आयोग ने प्रदेश के 75 जिलों के डीएम को पत्र लिखकर स्कूलों में मोबाइल से होमवर्क पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

हाइलाइट्स :

  • यूपी में 5वीं तक मोबाइल बैन पर महिला आयोग सख्त
  • गाजियाबाद की तीन बहनों की आत्महत्या के बाद कार्रवाई
  • सभी 75 जिलों के डीएम को भेजा गया निर्देशात्मक पत्र
  • स्कूलों में व्हाट्सएप से होमवर्क पर रोक की सिफारिश
  • बच्चों में बढ़ती डिजिटल और गेमिंग लत पर चिंता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर प्राथमिक विद्यालयों में मोबाइल के जरिए होमवर्क और असाइनमेंट भेजने पर रोक लगाने को कहा है।

यह कदम गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या की दुखद घटना के बाद उठाया गया है। आयोग के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चियों के मोबाइल गेम की लत और पिता द्वारा इसके विरोध को लेकर तनाव इस घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा मजबूरी थी, लेकिन वर्तमान में हालात सामान्य होने के बावजूद कई स्कूल व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों से बच्चों को शैक्षणिक कार्य भेज रहे हैं, जिससे कम उम्र के बच्चे लगातार मोबाइल पर निर्भर हो रहे हैं।

महिला आयोग ने निर्देश दिए हैं कि कक्षा 5 तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में, अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर, मोबाइल के माध्यम से शैक्षणिक कार्य न भेजे जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि पढ़ाई से जुड़ा सारा कार्य विद्यालय परिसर में ही पूरा कराया जाए, ताकि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर न पड़े।

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