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लखनऊ मंडल के 551 किमी रेलखंड पर कवच प्रणाली लगाने के लिए 492 करोड़ रुपये मंजूर। जानिए कैसे यह तकनीक ट्रेन हादसों को रोकेगी।

लखनऊ। ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने लखनऊ मंडल में ‘कवच’ प्रणाली लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 551 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर इस अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक को स्थापित करने के लिए 492 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह परियोजना रेलवे के आधुनिकीकरण और दुर्घटना मुक्त संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत पहले चरण में मानकनगर-लखनऊ जंक्शन-मल्हौर, सीतापुर सिटी-बुढ़वल, बुढ़वल-गोरखपुर कैंट, बुढ़वल-बाराबंकी और गोरखपुर कैंट-गोल्डेनगंज जैसे व्यस्त और संवेदनशील रेलखंडों को कवर किया जाएगा। इन मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना आवश्यक माना गया है।

परियोजना के तहत कुल 108 टेलीकॉम टावर स्थापित किए जाएंगे, जिनकी ऊंचाई लगभग 40 मीटर होगी। ये टावर ट्रेनों और ट्रैक के बीच लगातार संचार बनाए रखने में मदद करेंगे। टावर लगाने के लिए सर्वे कार्य पूरा हो चुका है, जबकि छपरा-बाराबंकी रेलखंड पर काम शुरू भी कर दिया गया है। आने वाले महीनों में अन्य रूटों पर भी तेजी से काम आगे बढ़ाया जाएगा।

‘कवच’ एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जिसे अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन ने विकसित किया है। यह प्रणाली सिग्नल पास करने में चूक (SPAD) या दो ट्रेनों के आमने-सामने आने जैसी स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटना को टाल देती है। इतना ही नहीं, यह लोको पायलट को लगातार सिग्नल और ट्रैक की जानकारी देता रहता है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना काफी कम हो जाती है।

तकनीकी रूप से ‘कवच’ प्रणाली में ट्रेन के इंजन पर ऑनबोर्ड कंप्यूटर, ब्रेक इंटरफेस यूनिट, लोको पायलट इंटरफेस, आरएफआईडी रीडर और रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम लगाया जाता है। वहीं ट्रैक पर आरएफआईडी टैग, स्टेशनरी कवच यूनिट, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और स्टेशन डेटा सेंटर स्थापित किए जाते हैं। ये सभी उपकरण मिलकर रियल टाइम में ट्रेन की गति, दूरी और सिग्नल की स्थिति की निगरानी करते हैं।

घने कोहरे या खराब मौसम में, जब दृश्यता कम हो जाती है, तब ‘कवच’ की भूमिका और भी अहम हो जाती है। यह सिस्टम लोको पायलट को पहले से चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटना से बचाता है। इससे खासतौर पर उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान होने वाली रेल दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

रेलवे की योजना है कि पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों में कुल 1,441 किलोमीटर रेलमार्ग को चरणबद्ध तरीके से ‘कवच’ प्रणाली से लैस किया जाए। इस दिशा में लखनऊ मंडल की शुरुआत को एक अहम कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कवच’ के व्यापक विस्तार से भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था वैश्विक मानकों के करीब पहुंचेगी। साथ ही यह तकनीक भविष्य में हाई-स्पीड और सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए भी आधार तैयार करेगी।

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