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Shankaracharya Avimukteshwaranand News: प्रयागराज माघ मेला 2026 में विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पहली बार बिना स्नान मेला छोड़ने का फैसला लिया। जानिए पूरा मामला।

हाइलाइट्स:

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में छोड़ने का किया ऐलान
  • 39 वर्षों के आध्यात्मिक जीवन में पहली बार बिना स्नान लौटे
  • मौनी अमावस्या पर पुलिस से टकराव के बाद बढ़ा विवाद
  • मेला प्रशासन के ससम्मान स्नान प्रस्ताव को ठुकराया
  • 18 दिन पहले ही माघ मेला छोड़कर प्रयागराज से प्रस्थान

प्रयागराज । प्रयागराज माघ मेला 2026 से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारी मन से माघ मेला बीच में ही छोड़ने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि अपने 39 वर्षों के आध्यात्मिक जीवन में यह पहली बार है जब वह बिना संगम स्नान किए लौट रहे हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भावुक होते हुए कहा,

“बहुत दुखी मन से माघ मेला छोड़ रहा हूं। प्रयागराज हमेशा से धर्म और शांति की भूमि रही है, लेकिन इस बार जो हुआ उसने मेरे मन को आहत किया।”

उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को पालकी से संगम स्नान के दौरान पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि उनके अनुयायियों और बटुकों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई।

बसंत पंचमी पर भी नहीं किया स्नान

विवाद के बाद 23 जनवरी को बसंत पंचमी का स्नान भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नहीं किया। उनका कहना था कि जब तक मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता और ससम्मान स्नान नहीं कराता, तब तक वह संगम नहीं जाएंगे।

मेला प्रशासन के नोटिस और प्रस्ताव

मेला विकास प्राधिकरण की ओर से उन्हें दो नोटिस जारी किए गए थे—

  • पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य पद को लेकर सवाल
  • दूसरे नोटिस में अव्यवस्था फैलाने और भूमि आवंटन रद्द करने की चेतावनी

हालांकि तीसरे पत्र में प्रशासन ने उन्हें ससम्मान पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शंकराचार्य ने इसे देरी और सम्मान की कमी बताते हुए अस्वीकार कर दिया।

18 दिन पहले छोड़ा माघ मेला

माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलना है। इसके बावजूद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 दिन पहले ही मेला छोड़ने का निर्णय ले लिया।

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