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सुप्रीम कोर्ट SC ST एक्ट फैसला: सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया कि केवल गाली-गलौच SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं है। कानून तभी लागू होगा जब सार्वजनिक रूप से जातिगत नाम लेकर अपमान किया गया हो।

हाइलाइट्स :

  • केवल अपशब्द SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं
  • जातिगत नाम का प्रयोग और अपमान की मंशा जरूरी
  • सार्वजनिक स्थान पर घटना होना अनिवार्य
  • सुप्रीम कोर्ट ने बताए अपराध के 4 मूलभूत तत्व

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सिर्फ गाली-गलौच करना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसमें जातिसूचक शब्दों का सार्वजनिक रूप से और अपमान करने के इरादे से प्रयोग न किया गया हो

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य जाति के आधार पर किए गए अपमान को रोकना है, न कि हर व्यक्तिगत विवाद को इस अधिनियम के अंतर्गत लाना। अदालत के अनुसार, आरोपों से यह स्पष्ट होना चाहिए कि अपशब्द जाति को लक्षित करते हुए कहे गए हों

धारा 3(1)(s) और 3(1)(r) पर क्या बोला कोर्ट

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 3(1)(s) के अंतर्गत वही मामला आएगा जिसमें जातिगत नाम लेकर अपमान किया गया हो। वहीं धारा 3(1)(r) के तहत सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर डराने या अपमानित करने का इरादा साबित होना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने बताए 4 जरूरी तत्व

SC/ST एक्ट के तहत अपराध साबित होने के लिए निम्न चार शर्तें अनिवार्य हैं:

  1. आरोपी SC/ST वर्ग का सदस्य न हो
  2. पीड़ित SC/ST वर्ग का सदस्य हो
  3. जानबूझकर जातिगत अपमान या धमकी दी गई हो
  4. यह कृत्य सार्वजनिक स्थान पर हुआ हो

अदालत ने कहा कि इन शर्तों के अभाव में SC/ST Act के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

क्यों है यह फैसला अहम

इस फैसले से जहां एक ओर वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने का रास्ता मजबूत हुआ है, वहीं दूसरी ओर कानून के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कानून का इस्तेमाल निजी रंजिश या दबाव बनाने के हथियार के रूप में नहीं होना चाहिए।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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