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“यूपी में 47,816 सरकारी कर्मचारियों ने संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया। स्वास्थ्य, गृह और राजस्व विभाग सबसे आगे रहे। योगी सरकार ने वेतन रोककर कार्रवाई शुरू की।

हाइलाइट्स :

  • यूपी में 47,816 सरकारी कर्मचारियों ने नहीं बताया संपत्ति का विवरण
  • स्वास्थ्य, गृह और राजस्व विभाग के कर्मचारी सबसे आगे
  • 73 विभागों में सिर्फ 8 ने किया 100% अनुपालन
  • संपत्ति न बताने वालों का वेतन रोका गया, कार्रवाई जारी

लखनऊ। यूपी में संपत्ति छिपाने वाले सरकारी कर्मचारी योगी सरकार की सख्ती के बावजूद नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अनिवार्य करने के बावजूद 47,816 राज्यकर्मियों ने 31 जनवरी 2026 तक अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संपत्ति न बताने वाले इन कर्मचारियों में स्वास्थ्य, गृह (पुलिस) और राजस्व विभाग के कार्मिक सबसे अधिक हैं। कुल मामलों में इन तीन विभागों की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत से ज्यादा है।

आंकड़ों के अनुसार,

  • स्वास्थ्य विभाग: 15,150 कर्मचारी (31.68%)
  • गृह विभाग (पुलिस): 6,479 कर्मचारी (13.55%)
  • राजस्व विभाग: 5,682 कर्मचारी (11.88%)

प्रदेश में कुल 8,65,460 राज्यकर्मी कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत सभी कर्मचारियों को हर वर्ष 31 जनवरी तक अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। तय समय सीमा में 8,17,631 कर्मचारियों ने विवरण अपलोड किया, जबकि शेष कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।

सरकार ने संपत्ति विवरण न देने वाले कर्मचारियों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

कार्रवाई के दायरे में केवल बाबू या कनिष्ठ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षा अधिकारी, पुलिस इंस्पेक्टर, राजस्व अधिकारी और लेखपाल तक शामिल हैं।

राज्य के 73 विभागों में से केवल 8 विभाग ऐसे रहे, जहां के सभी कर्मचारियों ने समय पर संपत्ति का ब्योरा दिया। इनमें पर्यावरण, ऊर्जा, सैनिक कल्याण, रेशम, आवास एवं नगर नियोजन, टेक्सटाइल, जिला गजेटियर और विधान परिषद सचिवालय शामिल हैं।

सरकार ने उन विभागों के ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्होंने नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों को फरवरी में वेतन भुगतान किया।

यह कार्रवाई योगी सरकार के पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

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